कभी नहीं सोचा था सियाचिन अभियान इतना लंबा चलेगा : पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी

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कभी नहीं सोचा था सियाचिन अभियान इतना लंबा चलेगा : पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी

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  • Publish Date - July 13, 2026 / 02:24 PM IST,
    Updated On - July 13, 2026 / 02:24 PM IST

मुंबई, 13 जुलाई (भाषा) वर्ष 1984 में सियाचिन ग्लेशियर की बर्फीली ऊंचाइयों पर भारतीय सेना की टुकड़ी का नेतृत्व करने वाले लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) संजय कुलकर्णी ने दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र में जारी चुनौतियों को लेकर हैरानी जताई है।

उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि यह अभियान 1984 से लेकर आज तक इतना लंबा चलेगा और अब भी जारी रहेगा।

गिरिमित्र सम्मेलन के मौके पर ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कुलकर्णी ने कहा, ‘‘मैंने अपने जीवन में कभी नहीं सोचा था कि यह अभियान इतने लंबे समय तक चलेगा, 1984 से लेकर आज तक। और यह अभी भी जारी है।’’

मुंबई में पर्वतारोहियों के इस वार्षिक सम्मेलन में उन्होंने सियाचिन की ऊंचाइयों पर रणनीतिक बढ़त हासिल करने के लिए चलाए गए अभियान से जुड़े अनुभव साझा किए।

कुलकर्णी ने बताया कि भारतीय सेना ने 13 अप्रैल, 1984 को ऑपरेशन मेघदूत शुरू किया था। उन्होंने एक युवा कैप्टन के रूप में बिलाफोंड ला तक टुकड़ी का नेतृत्व करते हुए ऊंचाई पर कब्जा सुनिश्चित करने की उनकी भूमिका को लेकर आम लोगों में आज भी बनी जिज्ञासा का स्वागत किया।

ऑपरेशन मेघदूत 1984 में भारतीय सेना द्वारा शुरू किया गया अभियान था, जिसका उद्देश्य हिमालय में भारत-पाकिस्तान-चीन सीमा के त्रिकोणीय क्षेत्र में स्थित सियाचिन ग्लेशियर पर नियंत्रण को लेकर पाकिस्तान की संभावित कार्रवाई से पहले रणनीतिक बढ़त हासिल करना था।

अत्यंत सम्मानित सैन्य अधिकारी के रूप में सेवानिवृत्त हुए कुलकर्णी ने जोर देकर कहा कि भारत को इन ऊंचाइयों को खाली कर अपनी बढ़त नहीं छोड़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि हर भारतीय सैनिक सियाचिन में सेवा देने पर गर्व महसूस करता है।

उन्होंने 2003 में घोषित संघर्ष विराम का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत को पाकिस्तान पर भरोसा नहीं करना चाहिए और न ही बातचीत के नाम पर अपनी चौकियां खाली करनी चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान आतंक का सौदागर है… वह कभी नहीं सुधर सकता। सियाचिन का समाधान बातचीत से नहीं हो सकता।’’

हिमालय की पूर्वी काराकोरम पर्वत श्रृंखला में स्थित सियाचिन ग्लेशियर लंबे समय से भारत और पाकिस्तान के बीच क्षेत्रीय विवाद का केंद्र रहा है। यह दुनिया का सबसे ऊंचा और सबसे कठिन सैन्य युद्धक्षेत्र माना जाता है।

भाषा मनीषा रंजन

रंजन