जनता ने छात्र आंदोलन की आड़ में देश को अराजकता में झोंकने की विपक्ष की कोशिश नाकाम की: शिंदे

जनता ने छात्र आंदोलन की आड़ में देश को अराजकता में झोंकने की विपक्ष की कोशिश नाकाम की: शिंदे

जनता ने छात्र आंदोलन की आड़ में देश को अराजकता में झोंकने की विपक्ष की कोशिश नाकाम की: शिंदे
Modified Date: July 26, 2026 / 09:24 pm IST
Published Date: July 26, 2026 9:24 pm IST

मुंबई, 26 जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने रविवार को दावा किया कि जनता ने छात्र आंदोलन की आड़ में देश को अराजकता में झोंकने की विपक्ष की कथित कोशिश को नाकाम कर दिया है।

शिंदे का यह बयान उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे द्वारा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का जश्न मनाने के लिए मार्च निकालने के कुछ घंटों बाद आया है।

उन्होंने मुंबई के गोरेगांव इलाके में एनईएससीओ केंद्र में एक कार्यक्रम के बाद संवाददाताओं से बातचीत में शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा।

उद्धव ठाकरे ने कहा कि युवाओं के विरोध-प्रदर्शनों ने मोदी सरकार के दौर में ‘‘लगभग दम तोड़ रहे’’ लोकतंत्र को ‘‘ऑक्सीजन’’ दी है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को भगवान विष्णु का अवतार बताया और कहा कि ‘‘बदलाव’’ लाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

शिंदे ने कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में हुए विरोध-प्रदर्शन की वजह बने नीट प्रश्नपत्र को देश के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना करार देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिना किसी देरी के कदम उठाए और छात्रों के भविष्य को सबसे ऊपर रखा।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार एक कड़ा कानून लाने जा रही है, जिसके तहत दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की कड़ी सजा, 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना और त्वरित अदालत में मुकदमा चलाया जाएगा। इस कानून के तहत किसी को भी कोई छूट नहीं मिलेगी।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) से जुड़े 47 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा जांच की जा रही है।

शिंदे ने कहा कि स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने भरोसा दिया है कि ‘‘किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।’’ उन्होंने छात्रों को न्याय दिलाने के लिए प्रधानमंत्री को बधाई दी।

शिवसेना अध्यक्ष ने कहा कि प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए इस्तीफा दे दिया है, और इसे एक जिम्मेदार लोकतांत्रिक कदम बताया।

राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए शिंदे ने सवाल किया कि जब नयी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉजपा के नेतृत्व में पहले से ही विरोध प्रदर्शन जारी था, तो मंगलवार को इतने सारे लोग प्रधानमंत्री आवास की ओर क्यों मार्च कर रहे थे।

शिंदे ने आरोप लगाया, ‘‘पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद एसपीजी (विशेष सुरक्षा समूह) अधिनियम लागू किया गया था। प्रधानमंत्री आवास के आस-पास विरोध-प्रदर्शन करने पर रोक है। यह जानते हुए भी, नेता प्रतिपक्ष (राहुल गांधी) ने जान-बूझकर वहां भीड़ जुटाई।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि यह कोई विरोध-प्रदर्शन नहीं, बल्कि देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश थी।

शिंदे ने दावा किया कि विपक्ष ‘जेन जेड’ आंदोलनों का जिक्र करते हुए भारत में वैसी ही अशांति की स्थिति पैदा करना चाहता था, जैसी बांग्लादेश, श्रीलंका और अन्य देशों में हुई थी। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन इस देश के लोगों ने उस कोशिश को पूरी तरह नाकाम कर दिया।’’

उन्होंने उद्धव या राज ठाकरे का नाम लिए बिना आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के कुछ नेताओं ने छात्रों के मंच से भड़काऊ बयान दिए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वे छात्र आंदोलन में राजनीति को मिलाने और राज्य में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे थे।

शिंदे ने कहा, ‘‘लेकिन महाराष्ट्र के लोगों ने उन्हें पहले ही नकार दिया है। यहां तक कि छात्रों ने भी उनकी राजनीति को खारिज कर दिया। जैसे ही विरोध प्रदर्शन खत्म हुआ, उनका पूरा राजनीतिक एजेंडा धराशायी हो गया।’’

उन्होंने विपक्ष पर अपना हमला जारी रखते हुए कहा कि छात्रों का विरोध प्रदर्शन समाप्त हो गया है क्योंकि उनकी मांगें मान ली गई हैं, लेकिन जो लोग इन आंदोलनों के जरिए अपनी राजनीतिक किस्मत चमकाने की कोशिश कर रहे थे, उन्हें निराशा हाथ लगी है।

भाषा धीरज नेत्रपाल

नेत्रपाल


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