मुंबई, 12 अप्रैल (भाषा) महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिग्गज गायिका आशा भोसले को श्रद्धांजलि देते हुए रविवार को कहा कि उनके निधन के साथ भारतीय संगीत जगत का एक स्वर्णिम युग समाप्त हो गया।
भोसले का 92 वर्ष की उम्र में रविवार को निधन हो गया। उनकी पोती जनाई भोसले ने बताया कि सीने में संक्रमण और कमजोरी के कारण उन्हें शनिवार शाम मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने भोसले के साथ अपनी हालिया मुलाकात को याद करते हुए कहा, “हम ‘विश्व रेडियो दिवस’ के एक कार्यक्रम में साथ थे, जहां उन्होंने मुझसे ‘अभी न जाओ छोड़कर’ गाने का आग्रह किया था। मुस्कुराते हुए उन्होंने कहा था—‘देखिए, मैंने मुख्यमंत्री से गाना गवा दिया।’ यह विश्वास करना बेहद कठिन है कि अब वह हमारे बीच नहीं हैं।”
उन्होंने कहा, “उनके इस दुनिया से जाने के कारण लता मंगेशकर के बाद मंगेशकर परिवार का एक और उज्ज्वल सितारा डूब गया। आज सुरों का वह सुंदर उपवन जैसे सूना पड़ गया है।”
राज्यपाल वर्मा ने अपने शोक संदेश में कहा कि आशा भोसले भारत की उन पार्श्व गायिकाओं में से थीं, जिनका कोई सानी नहीं। उनकी मधुर आवाज, हर शैली में ढल जाने की अद्भुत क्षमता और संगीत के प्रति उनका समर्पण, पीढ़ियों के दिलों में अमिट छाप छोड़ गया है।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध कर देने वाली वह अलौकिक आवाज अब सदा के लिए खामोश हो गई है।
शिंदे ने कहा, “पिछले कई दशकों में शायद ही कोई दिन ऐसा बीता हो, जिसकी शुरुआत या अंत उनकी आवाज सुने बिना हुआ हो। उनके गीतों ने अनगिनत पलों को आनंद से भर दिया और जीवन को खुशियों के रंगों से सजाया। यह स्वीकार करना कठिन है कि आशा ताई अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज सदा हमारे साथ रहेगी।”
उन्होंने कहा, “मुझे कई अवसरों पर आशा ताई से मिलने का सौभाग्य मिला और वे अविस्मरणीय क्षण हमेशा मेरी स्मृतियों में अंकित रहेंगे।”
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने कहा कि आशा भोसले के निधन के साथ ही संगीत जगत का एक स्वर्णिम युग समाप्त हो गया और “ सुर सम्राज्ञी” अब इतिहास के पन्नों में अमर हो गई हैं।
उन्होंने कहा, “आशा भोसले का जीवन-सफर कठिन परिश्रम और कला के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक है। अपनी आवाज के जादू से उन्होंने पीढ़ी दर पीढ़ी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। उनका जाना भारतीय संगीत जगत के लिए एक गहरी क्षति है।”
भाषा
खारी नरेश
नरेश