मुंबई, 20 जनवरी (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने यहां आजाद मैदान में आरक्षण को लेकर एक और प्रदर्शन की अनुमति मांगने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा है कि पिछले साल मनोज जरांगे की मराठा आरक्षण की भूख हड़ताल के दौरान प्रदर्शनकारियों ने शहर को ‘बर्बाद’ कर दिया और गंदगी साफ किए बिना चले गए।
न्यायमूर्ति रविंद्र घुगे और अभय मंत्री की खंडपीठ ने सोमवार को ये टिप्पणियां तब कीं जब एक वकील ने आरक्षण की मांग को लेकर धनगर समुदाय द्वारा प्रदर्शन के लिए एक दिन की अनुमति मांगने के लिए अदालत में याचिका दायर की।
पुलिस द्वारा मैदान का उपयोग करने की अनुमति देने से इनकार करने के बाद दीपक बोरहाडे ने याचिका दायर की थी।
उच्च न्यायालय ने कहा कि एक दिन के लिए अनुमति मांगी जाती है लेकिन फिर प्रदर्शनकारी तय समय से अधिक समय तक रुक जाते हैं।
न्यायालय ने कहा, ‘हमें पिछले साल मराठा समुदाय द्वारा किया गया विरोध प्रदर्शन याद है’ जिन्होंने एक दिन के लिए अनुमति मांगी थी, लेकिन छह दिनों तक वहां से नहीं हटे।
न्यायाधीश ने कहा कि प्रदर्शनकारी तय समय से अधिक समय तक रुके रहे और उन्होंने ‘शहर को बर्बाद कर दिया।’
न्यायमूर्ति घुगे ने कहा, ‘हमने प्रदर्शनकारियों से विशेष रूप से कहा था कि वे जाने से पहले उन क्षेत्रों को साफ कर दें जहां उन्होंने प्रदर्शन किया, लेकिन वे बिना सफाई किए भाग गए और नगर निगम को गंदगी साफ करनी पड़ी।’
न्यायालय ने याचिका की सुनवाई के लिए 28 जनवरी की तारीख तय की है।
बोरहाडे ने धनगर आरक्षण के लिए 21 जनवरी को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की अनुमति मांगी थी लेकिन अदालत ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन किसी भी दिन आयोजित किया जा सकता है।
कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने मराठों के लिए आरक्षण की मांग को लेकर पिछले साल 29 अगस्त को आजाद मैदान में भूख हड़ताल शुरू की थी।
उनके हजारों समर्थक शहर में पहुंच गए जिससे दक्षिण मुंबई में जनजीवन ठप्प हो गया।
उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप और महाराष्ट्र सरकार के साथ बातचीत के बाद जरांगे ने तीन सितंबर को विरोध प्रदर्शन समाप्त कर दिया।
भाषा
शुभम नरेश
नरेश