मुंबई, छह अगस्त (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र वैद्यकीय परिषद (एमएमसी) में होम्योपैथिक चिकित्सकों के पंजीकरण के विरोध में हड़ताल पर गए रेजिडेंट डॉक्टरों को तत्काल काम पर लौटने का निर्देश दिया और चिंता जतायी कि इस हड़ताल का असर राज्यभर के अस्पतालों में मरीजों पर पड़ रहा है।
इसके बाद महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (एमएआरडी) ने अदालत को आश्वासन दिया कि हड़ताल समाप्त कर दी जाएगी।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड़ की पीठ ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया और चेतावनी दी कि यदि प्रदर्शनकारी डॉक्टर तुरंत काम पर नहीं लौटे तो उनके वेतन को रोकने का आदेश दिया जा सकता है।
अदालत ने कहा कि अपने अधिकारों के लिए आंदोलन करना हर व्यक्ति का कानूनी अधिकार हो सकता है, लेकिन यह मरीजों की जान की कीमत पर नहीं होना चाहिए।
पीठ ने कहा, ‘‘हमें हजारों मरीजों और महाराष्ट्र के निवासियों के स्वास्थ्य की चिंता है।’’ अदालत ने डॉक्टरों से तत्काल हड़ताल समाप्त कर काम पर लौटने को कहा।
अदालत ने पूछा, ‘‘आप मरीजों के इलाज और उनकी जान को जोखिम में डालकर हड़ताल क्यों कर रहे हैं? मान लीजिए कल आपका आंदोलन सफल हो जाता है, लेकिन यदि इस दौरान कुछ मरीजों की मौत हो गई तो क्या आप उन्हें वापस जीवित कर पाएंगे?’’
अदालत की इस टिप्पणी के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एस. यू. कामदार और एमएआरडी के अध्यक्ष डॉ. अथर्व शिंदे ने कहा कि हड़ताल समाप्त कर दी जाएगी।
इसके बाद अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता विनीत नाइक और अधिवक्ता अमोघ सिंह को न्यायमित्र नियुक्त किया और उनसे एक याचिका तैयार करने को कहा, ताकि भविष्य में डॉक्टरों द्वारा इस तरह की हड़ताल रोकने के लिए आवश्यक दिशानिर्देश जारी किए जा सकें।
पीठ ने कहा कि वह नहीं चाहती कि हड़ताल के कारण सरकारी निकायों द्वारा संचालित अस्पतालों में किसी एक भी व्यक्ति की जान जाए।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई आठ सितंबर को निर्धारित की।
अदालत ने कहा, ‘हमें देखना होगा कि इसके क्या परिणाम हो सकते हैं। कोई यह समझ सकता है कि यदि किसी कारखाने में 30 दिन तक हड़ताल रहती है, तो सबसे बुरा परिणाम पैसे या कमाई का नुकसान होता है। वकीलों के मामले में, हम कुछ नहीं कहते। डॉक्टरों के मामले में, यदि मरीजों की मौत हो जाए, तो क्या वे उन्हें वापस जीवन दे सकते हैं?’
अदालत ने इसका भी संज्ञान लिया कि डॉक्टरों ने अब कहा है कि यदि सरकार के साथ गतिरोध जारी रहा, तो वे गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में भी अपनी सेवाएं बंद कर देंगे।
महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स ने सरकार के उस फैसले के खिलाफ बुधवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी, जिसमें होम्योपैथिक चिकित्सकों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (एमएमसी) के तहत पंजीकरण कराने और एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति दी गई है।
भाषा गोला पवनेश
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