अदालत से एसपीसीएल को राहत, ईडी को जमा राशि का ब्याज सशस्त्र बल कोष में देने का निर्देश

अदालत से एसपीसीएल को राहत, ईडी को जमा राशि का ब्याज सशस्त्र बल कोष में देने का निर्देश

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  • Publish Date - January 14, 2026 / 03:50 PM IST,
    Updated On - January 14, 2026 / 03:50 PM IST

मुंबई, 14 जनवरी (भाषा) बम्बई उच्च न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को निर्देश दिया है कि वह एक कुर्की से संबंधित मामले में जमा 46 करोड़ रुपये पर अर्जित ब्याज का आधा हिस्सा सशस्त्र बलों के कल्याण कोष में जमा करे।

अदालत ने यह भी कहा कि देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले सैनिकों के परिवारों की मदद करना ‘अत्यंत आवश्यक’ है।

न्यायमूर्ति ए. एस. गडकरी और न्यायमूर्ति आर. आर. भोंसले की पीठ ने यह निर्देश प्रवर्तन निदेशालय की एक अपील खारिज करते हुए दिया।

यह अपील 2019 में एक अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए उस आदेश के खिलाफ थी, जिसमें शापूरजी पलोनजी एंड कंपनी लिमिटेड (एसपीसीएल) की 141.50 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों की कुर्की को रद्द कर दिया गया था।

अदालत ने 2019 में ईडी द्वारा अपील दायर करने के बाद न्यायाधिकरण के आदेश पर रोक लगा दी थी, लेकिन केंद्रीय एजेंसी को अदालत में 46.5 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया था।

उच्च न्यायालय ने 23 दिसंबर, 2025 के अपने अंतिम आदेश में न्यायाधिकरण के फैसले को बरकरार रखा और जमा की गई राशि एसपीसीएल को वापस करने का आदेश दिया। आदेश की एक प्रति इस सप्ताह उपलब्ध कराई गई है।

पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि 46.5 करोड़ रुपये पर अर्जित ब्याज का 50 प्रतिशत सशस्त्र बल ‘युद्ध हताहत कल्याण कोष’ को सौंपा जाना चाहिए।

अदालत ने कहा कि वह भारतीय सैनिकों के समर्पण और देश की सेवा करते हुए उनके (सैनिकों के) जानमाल की हानि को ध्यान में रखते हुए ऐसा आदेश पारित कर रही है।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘युद्ध के मैदान में और देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए अपनी जान गंवाने वाले सैनिकों के परिवारों और विधवाओं को सहायता प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है।’’

यह मामला एसपीसीएल द्वारा नीलेश ठाकुर और उनकी कंपनियों को 2005 से अलीबाग और पेन में 30 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से 900 एकड़ जमीन खरीदने के समझौते के तहत भुगतान की गई राशि से संबंधित था।

ईडी ने दावा किया कि ये भुगतान ‘अपराध की आय’ थे, जो एक लोकसेवक रहे नीलेश ठाकुर के खिलाफ दर्ज आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले से जुड़े थे।

एसपीसीएल ने कुर्की को चुनौती देते हुए दलील दी थी कि यह पैसा भूमि खरीद समझौते के तहत दिया गया था और आयकर अभिलेखों में इसे अग्रिम भुगतान के रूप में दर्ज किया गया था।

कंपनी ने यह भी दलील दी थी कि ठाकुर लगभग चार वर्षों से ‘अवैध अवकाश’ पर थे और भुगतान किए जाने के समय सार्वजनिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं कर रहे थे।

धनशोधन निवारण अधिनियम न्यायाधिकरण ने जनवरी 2019 में एसपीसीएल की दलीलें स्वीकार कर ली थी और यह मानते हुए कि धन को अपराध की आय के रूप में नहीं माना जा सकता है, कुर्क की गई संपत्तियों को मुक्त कर दिया था।

भाषा

सुरेश नरेश

नरेश