शिवसेना पार्षद का चिकित्सकों पर हमला, विपक्ष ने मुख्यमंत्री को घेरा

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शिवसेना पार्षद का चिकित्सकों पर हमला, विपक्ष ने मुख्यमंत्री को घेरा

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  • Publish Date - July 8, 2026 / 03:56 PM IST,
    Updated On - July 8, 2026 / 03:56 PM IST

मुंबई, आठ जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र के ठाणे जिले के एक अस्पताल में नवजात शिशु को बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह दिए जाने से नाराज शिवसेना के एक पार्षद और उसके साथियों ने कथित तौर पर दो चिकित्सकों के साथ मारपीट की। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी।

विपक्षी शिवसेना (उबाठा) ने सरकार को घेरते हुए पूछा कि क्या मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ऐसी ‘गुंडागर्दी’ बर्दाश्त करेंगे, वहीं सत्तारूढ़ शिवसेना के सांसद श्रीकांत शिंदे, जो खुद एक चिकित्सक हैं, ने हमले की निंदा की और कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस ने बताया कि यह घटना सोमवार शाम कल्याण स्थित नगर निगम संचालित अस्पताल में हुई। घटना का वीडियो वहां लगे कैमरे में रिकार्ड हो गया जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

वीडियो में पार्षद को कथित तौर पर चिकित्सकों को मारते हुए दिखाया गया है।

भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) के विरोध और दबाव के बाद, जिसने तत्काल कार्रवाई नहीं होने पर क्षेत्र के क्लीनिक और अस्पताल बंद करने की चेतावनी दी थी, पुलिस ने मंगलवार रात शिवसेना के पार्षद रमेश सुक्रया म्हात्रे और पांच अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया।

एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना राज्य की महायुति सरकार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सहयोगी है।

शिवसेना (उबाठा) के विधायक आदित्य ठाकरे ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में इस घटना को लेकर पूछा कि क्या मुख्यमंत्री फडणवीस अपने सहयोगी की इस ‘गुंडागर्दी’ को बर्दाश्त करेंगे?

ठाकरे ने कहा, ‘क्या वह ‘मिंधे’ गुट के इस गुंडे को गिरफ्तार कर उसे पार्षद पद से बर्खास्त करेंगे? या वह चिकित्सकों और नर्सों के साथ-साथ हर किसी को यह संदेश देंगे कि महाराष्ट्र में ऐसी अराजकता देखी जा रही है और सरकार इस पर चुप है।’

हालांकि, शिवसेना के कल्याण के सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा कि चिकित्सकों और कर्मचारियों पर हमला बेहद निंदनीय है।

उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘एक चिकित्सक होने के नाते, मैं जानता हूं कि मरीज की सेवा केवल एक काम नहीं, बल्कि मानवता की सेवा है। अत्यंत प्रतिकूल और तनावपूर्ण परिस्थितियों में भी चिकित्सक, नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मी दिन-रात जनता की सेवा के लिए मेहनत करते हैं।’

इस घटना के संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जो कोई भी कानून अपने हाथ में लेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सांसद ने कहा, ‘इस मामले पर पार्टी का रुख भी स्पष्ट है। पार्टी इस हमले में शामिल किसी भी व्यक्ति का समर्थन नहीं करेगी। दोषियों के खिलाफ पार्टी के भीतर भी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।’

उन्होंने कहा, ‘एक जन प्रतिनिधि और एक चिकित्सक के रूप में, मैं केडीएमसी अस्पताल के सभी चिकित्सकों, नर्सों और चिकित्सा कर्मचारियों के साथ मजबूती से खड़ा हूं। हम सभी को उनकी सुरक्षा, गरिमा और निडर होकर सेवा प्रदान करने के उनके अधिकार का सम्मान करना चाहिए।’

पुलिस के अनुसार, यह घटना कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (केडीएमसी) द्वारा संचालित शास्त्री नगर अस्पताल में हुई।

डॉ. सृष्टि बाविस्कर और डॉ. वैभव सालुंखे ने नवजात शिशु के परिजनों को अस्पताल के नवजात गहन चिकित्सा कक्ष (एनआईसीयू) में जगह की कमी के कारण बच्चे को बेहतर इलाज के लिए किसी अन्य अस्पताल में स्थानांतरित करने की सलाह दी थी।

इस बात से नाराज परिजनों ने पार्षद से संपर्क किया। इसके बाद पार्षद ने अस्पताल पहुंचकर कथित तौर पर चिकित्सकों के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए उनकी पिटाई कर दी। इस घटना में डॉ. वैभव सालुंखे घायल हो गए।

केडीएमसी की चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दीपा शुक्ला ने चिकित्सा कर्मचारियों के साथ सोमवार देर रात पुलिस से संपर्क किया, लेकिन उस समय मामला दर्ज नहीं किया गया।

मंगलवार दोपहर को हमले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। आम जनता और चिकित्सा संगठनों ने सत्तारूढ़ एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि वह कथित तौर पर पार्षद को बचाने की कोशिश कर रही है।

म्हात्रे और उनके सहयोगियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हुए, अस्पताल कर्मियों ने मंगलवार को ‘काम रोको’ प्रदर्शन किया। आईएमए कल्याण और डोंबिवली इकाइयों के प्रतिनिधियों और नगर निगम कर्मचारी संघ के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने केडीएमसी आयुक्त अभिनव गोयल से मुलाकात की।

आईएमए प्रतिनिधियों ने यह भी चेतावनी दी कि यदि प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई तो वे बुधवार को इस क्षेत्र के सभी निजी क्लीनिक और अस्पताल बंद कर देंगे। उन्होंने पार्षद और उनके समर्थकों की तत्काल गिरफ्तारी की भी मांग की।

पुलिस ने बताया कि इसके बाद पार्षद, उनके चार पुरुष समर्थकों और एक महिला के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 132 (लोक सेवक को कर्तव्य पालन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग), 121(1) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 351(1) (आपराधिक धमकी), 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना), 189(2) (गैरकानूनी रूप से जमा होना) और 191(2) (दंगा करना) के तहत मामला दर्ज किया गया।

सहायक पुलिस आयुक्त सुहास नेमाड़े ने पत्रकारों को बताया कि घटना की जांच जारी है और अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

भाषा तान्या नरेश

नरेश