मुंबई, 29 अप्रैल (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने मानहानि के एक मुकदमे को ‘‘जीवन के अंतिम पड़ाव पर’’ पक्षकारों के बीच ‘‘अहंकार की लड़ाई’’ करार देते हुए सुनवाई 2046 तक के लिए स्थगित करने के एक दिन बाद, बुधवार को अपने आदेश में संशोधन किया और मामले की सुनवाई इस वर्ष जुलाई में निर्धारित की।
न्यायमूर्ति जितेंद्र जैन की पीठ ने मंगलवार को पक्षों द्वारा मुकदमेबाजी में अड़े रहने की आलोचना की और कहा कि इसकी वजह से अधिक जरूरी मामलों को प्राथमिकता देने में बाधा उत्पन्न हुई।
उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की थी कि यह उन मामलों में से एक है जहां जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुंचे पक्षकारों के बीच ‘अहंकार की लड़ाई’ व्यवस्था को अवरुद्ध कर देती है, जिससे अदालत उन मामलों पर सुनवाई करने में असमर्थ हो जाती है जिन्हें प्राथमिकता की आवश्यकता होती है।
मामले में वादी तारिणीबहन देसाई के वकील स्वराज जाधव ने बुधवार को अदालत के समक्ष अर्जी दाखिल कर मंगलवार को पारित आदेश में उनके मुवक्किल के खिलाफ की गई टिप्पणियों को हटाने का आग्रह किया।
न्यायमूर्ति जैन ने अनुरोध स्वीकार कर लिया और टिप्पणियों को हटाने का आदेश दिया। साथ ही सुनवाई की अगली तारीख को वर्ष 2046 से संशोधित करके 15 जुलाई, 2026 कर दिया।
वादी देसाई (90) ने मुंबई की श्याम को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के भीतर हुए विवाद के सिलसिले में 2017 में किल्किलराज भंसाली के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था।
विवाद की शुरुआत 2015 की वार्षिक आम बैठक से संबंधित नोटिस, पत्र और प्रस्ताव से हुई, जिनमें देसाई को हाउसिंग सोसाइटी से निष्कासित करने का प्रस्ताव भी शामिल था।
देसाई ने सोसाइटी के संदेशों से मानसिक उत्पीड़न होने का हवाला देते हुए उन्हें मानहानिकारक करार दिया और 20 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की।
अदालत को 2018 में सुलह समझौता होने की संभावना के बारे में सूचित किया गया था। हालांकि, सुलह समझौता नहीं हो पाया और अदालत ने दीवानी मुकदमे की कार्यवाही शुरू करने से पहले सुनवाई के मुद्दों को स्पष्ट किया।
उच्च न्यायालय ने मंगलवार के अपने आदेश में कहा कि पिछली सुनवाइयों में उसने कहा था कि अगर पक्षकार बिना शर्त माफी मांग लें तो मामले का समाधान निकाला जा सकता है।
देसाई ने हालांकि मानहानि का मुकदमा जारी रखने पर जोर दिया था। उनके वकील स्वराज जाधव ने बुधवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि वह अब भी मुकदमा आगे बढ़ाने के लिए कृतसंकल्प हैं।
भाषा धीरज नरेश
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