(Chaitra Navratri Day 6 Bhog / Image Credit: Facebook)
Maa Katyayani ki Puja Vidhi: चैत्र नवरात्रि का छठा दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, मां कात्यायनी ने महिषासुर का वध कर संसार को उसके आतंक से मुक्त कराया था, इसलिए उन्हें दानवों की संहारक कहा जाता है। माना जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से उनकी पूजा करते हैं, उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। विशेष रूप से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और योग्य जीवनसाथी का आशीर्वाद मिलता है।
मां कात्यायनी का स्वरूप बेहद तेजस्वी और आकर्षक माना जाता है। उनकी चार भुजाएं होती हैं। दाईं ओर का एक हाथ अभय मुद्रा में होता है, जो भक्तों को भय से मुक्ति देता है, जबकि दूसरा हाथ वरद मुद्रा में होता है, जो आशीर्वाद प्रदान करता है। बाईं ओर के हाथों में तलवार और कमल का फूल होता है। उनका वाहन सिंह है, जो शक्ति और साहस का प्रतीक है।
इस दिन पूजा की शुरुआत कलश पूजन से की जाती है, जिसमें सभी देवताओं का आह्वान किया जाता है। इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लिया जाता है। मां की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराया जाता है और फिर उन्हें पीले वस्त्र, पीले फूल, हल्दी और श्रृंगार की सामग्री अर्पित की जाती है। अंत में घी का दीपक जलाकर धूप-दीप के साथ आरती की जाती है। पूजा के दौरान नियमों का विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है।
मां कात्यायनी की पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इससे साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है और नकारात्मकता दूर होती है। धार्मिक मान्यता है कि अविवाहित कन्याओं के लिए यह पूजा विशेष फलदायी होती है, जिससे उन्हें मनचाहा जीवनसाथी मिलता है। इसके अलावा, परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।