Kanwar Yatra 2026: कांवड़ यात्रा में गलती से खंडित हो गई कांवड़? जानिए वो खास उपाय, जिससे भोलेनाथ की कृपा से पूरी होगी आपकी पवित्र यात्रा

Ads

Kanwar Yatra 2026: कांवड़ यात्रा में अगर कांवड़ टूट जाए, गिर जाए या जल अशुद्ध हो जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसी स्थिति में श्रद्धा के साथ भोलेनाथ से क्षमा मांगें, कांवड़ को शुद्ध करें और दोबारा पवित्र जल भरकर यात्रा को आगे बढ़ाएं।

  •  
  • Publish Date - August 6, 2026 / 12:16 PM IST,
    Updated On - August 6, 2026 / 12:31 PM IST

(Kanwar Yatra 2026/ Image Credit: AI-generated)

HIGHLIGHTS
  • कांवड़ खंडित होने पर घबराने की जरूरत नहीं।
  • पहले भोलेनाथ से क्षमा मांगकर नया जल भरें।
  • अशुद्ध जल को शिवलिंग पर अर्पित न करें।

Kanwar Yatra 2026: सावन महीने की शुरुआत के साथ ही देशभर में कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra 2026) शुरू हो चुकी है। लाखों शिवभक्त भगवान शिव को जल चढ़ाने के लिए इस पवित्र यात्रा में शामिल होते हैं। कांवड़ यात्रा में नियम, श्रद्धा और पवित्रता का विशेष महत्व माना जाता है। कई बार यात्रा के दौरान गलती से कांवड़ जमीन से छू जाती है, गिर जाती है, टूट जाती है या जल अशुद्ध हो जाता है तो ऐसी स्थिति को कांवड़ खंडित होना कहा जाता है। लेकिन ऐसी परिस्थिति में भक्तों को डरने या निराश होने की जरूरत नहीं है। श्रद्धा और सही विधि से यात्रा दोबारा शुरू की जा सकती है।

भोलेनाथ से क्षमा मांगकर भरें नया पवित्र जल

अगर कांवड़ खंडित हो जाए तो सबसे पहले शांत मन से भगवान भोलेनाथ और मां गंगा से क्षमा प्रार्थना करनी चाहिए। अगर कांवड़ का जल जमीन पर गिर गया है या किसी कारण से अशुद्ध हो गया है तो उस जल को शिवलिंग पर अर्पित नहीं करना चाहिए। भक्तों को किसी पवित्र नदी, गंगा घाट या साफ जल स्रोत से दोबारा पवित्र जल भरना चाहिए। नए जल के साथ ही यात्रा को आगे बढ़ाना उचित माना जाता है। मान्यता है कि भगवान शिव भक्तों की भावना और श्रद्धा को देखते हैं। इसलिए सच्चे मन से की गई प्रार्थना स्वीकार करते हैं।

टूटी कांवड़ को बदलकर करें शुद्धिकरण

यदि कांवड़ का ढांचा टूट गया है या ज्यादा खराब हो गया है तो उसे बदलना बेहतर माना जाता है। नई कांवड़ (Kanwar Yatra 2026) लेने के बाद उसे गंगाजल से शुद्ध करें और धूप-दीप दिखाकर पूजा करें। इसके बाद ही यात्रा को आगे बढ़ाना चाहिए। बिना शुद्ध किए खराब कांवड़ के साथ आगे बढ़ना उचित नहीं माना जाता। कांवड़ की पवित्रता बनाए रखना यात्रा के नियमों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

मंत्र जाप और संकल्प के साथ पूरी करें यात्रा

कांवड़ को शुद्ध करने के बाद भक्त प्रायश्चित के रूप में भगवान शिव का स्मरण (Kanwar Yatra 2026) कर सकते हैं और ‘ऊँ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप कर सकते है। कई श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार दान या जरूरतमंदों की सहायता करने का संकल्प भी लेते है। इससे मन को शांति मिलती है और यात्रा के प्रति श्रद्धा बनी रहती है। मान्यता है कि महादेव अपने भक्तों की सच्ची भक्ति और भाव देखते हैं। इसलिए किसी गलती के बाद भय नहीं बल्कि विश्वास और श्रद्धा के साथ कांवड़ यात्रा पूरी करनी चाहिए।

इन्हें भी पढ़ें:

कांवड़ खंडित होने का क्या मतलब है?

यात्रा के दौरान कांवड़ का जमीन से छू जाना, गिरना, टूटना या जल का अशुद्ध हो जाना कांवड़ खंडित होना माना जाता है।

कांवड़ टूट जाए तो सबसे पहले क्या करना चाहिए?

ऐसी स्थिति में शांत होकर भगवान शिव और मां गंगा से क्षमा प्रार्थना करनी चाहिए और यात्रा को सही विधि से दोबारा शुरू करना चाहिए।

अगर कांवड़ का जल गिर जाए तो क्या करें?

गिरा हुआ या अशुद्ध जल शिवलिंग पर अर्पित नहीं करना चाहिए। नया पवित्र जल भरकर ही आगे की यात्रा करनी चाहिए।

टूटी हुई कांवड़ के साथ यात्रा जारी रखनी चाहिए या नहीं?

अगर कांवड़ ज्यादा खराब हो गई है तो नई कांवड़ लेना और उसे शुद्ध करके यात्रा आगे बढ़ाना उचित माना जाता है।