Vasudha 20th April 2026/Image Credit: ScreenGrab / Youtube / @TellyChakkar
Vasudha: ‘Zee Tv‘ पर आ रहा दर्शकों का सबसे पसंदीदा शो ‘वसुधा‘ की कहानी में बहुत ही भयावह और खतरनाक मोड़ आ चूका है जहां करिश्मा एक बार फिर घर तो लौटती किन्तु जवाब के साथ नहीं बल्कि हाथों में अस्थियों का कलश लेकर, जिसे देख चौहान परिवार के सदस्यों के पैरो तले ज़मीन खिसक जाती है। यह मंज़र उनके लिए किसी तबाही से कम नहीं होता..
चौहान परिवार पहले से ही टूटा हुआ है और प्रभात के लौटने की उम्मीद कर रहा है खासकर देव, लेकिन करिश्मा सिर्फ उस उम्मीद को तोड़ती नहीं है बल्कि अपने पैरो तले रौंद देती है। करिश्मा अस्थियों के कलश के साथ घर में प्रवेश करती है और यह दावा करती है कि यह अस्थियाँ प्रभात की ही हैं। उस पल में मानों सब कुछ बदल जाता है।
उस कलश को देख चौहान परिवार स्तब्ध रह जाता है। देव तो सदमे में चला जाता है। वह जो उसे अब तक खोज रहा था, लड़ रहा था और जिसे उम्मीद थी कि वह प्रभात को ढूँढ़ निकालेगा, अचानक से सब कुछ ख़त्म हो जाता है। करिश्मा अपना काम कर देती है – परिवार को पूरी तरह अंदर से तोड़ने का..
करिश्मा ने इससे पहले शर्त रखी थी कि प्रोपर्टी के पेपर्स पर साइन करके सारी प्रॉपर्टी उसके नाम करो, तभी वह प्रभात के बारे में सच बताएगी। देव और वसुधा, जवाब जानने की बेचैनी में उसकी शर्त मान लेते हैं, किन्तु करिश्मा ने सिर्फ जानकारी देने की बात कही थी न की ईमानदारी का वादा किया था।
जब तक परिवार के सामने सच आता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। प्रॉपर्टी के कागज़ों पर साइन हो चूका होता है और प्रॉपर्टी हाथ से चली जाती है। अब चौहान परिवार सिर्फ भ्रम और गम में डूब जाता है। सब कुछ रेत की तरह, हाथों से फिसलता हुआ नज़र आता है।
जहां चौहान परिवार, गम में डूबा हुआ नज़र आता है वहीं करिश्मा अपनी जीत के नशे में पूरी तरह डूबी होती है, आखिरकार उसने वह हासिल कर ही लिए जो वह शुरू से चाहती है। किन्तु, कहानी में नया मोड़ तो तब आता है जब वसुधा को शक होता है। उसे समय, अस्थियां और चिट्ठी बहुत ही आसान तरीके से उपलब्ध करवाई हुई लगती है। उसका अंतर्मन इस सच्चाई को मानने से इनकार कर देता है और अंतरात्मा की यही आवाज़, उसकी आखिरी उम्मीद बन जाती है।
अविनाश और दिव्या भी इस पर भरोसा करने से हिचकिचाते हैं। परिवार अब लिखावट के जानकार (हैंडराइटिंग एक्सपर्ट) की मदद लेता है जिससे यह साफ़ हो जाता है कि अब चौहान परिवार करिश्मा पर आँख मूँदकर भरोसा नहीं कर रहा है। फिर भी, इस बार करिश्मा ने इतनी शातिराना तरीके से इस योजना को अंजाम दिया है कि शायद ही जाँच-पड़ताल से उसे तुरंत बेनक़ाब किया जा सके, जिससे परिवार शक और निराशा के बीच फंस गया है।
देव पूरी तरह से बिखर चूका है। वह साफ़ तरीके से सोच नहीं पा रहा, जो करिश्मा चाहती है। वह अब कमज़ोर पड़ चूका है।
वसुधा की कहानी, अब एक एहम मोड़ पर आ खड़ी हुई है। अब यह देखना बहुत ही दिलचस्प होगा कि अगर प्रभात सचमुच इस दुनिया से चला गया है तो यह चौहान परिवार के लिए बहुत ही मुश्किल दौर है किन्तु यदि वह ज़िंदा है, तो करिश्मा अब तक का सबसे घिनौना खेल खेल रही है – मौत का नाटक, सबूतों की हेरा-फेरी और परिवार को अंदरूनी तौर पर क्षति पहुंचाना।