vasudha 24th April 2026/Image Credit: ScreenGrab / Youtube / @TellyChakkar
Vasudha Upcoming Twist: ‘Zee TV‘ के सबसे पसंदीदा शो ‘वसुधा‘ ने इस हफ्ते भी टी.आर.पी में नंबर 2 पर अपना सिक्का जमाए रखा। लगातार कहानी में आ रहे ट्विस्ट एन टर्न्स, दर्शकों को अपनी जगह से हिलने नहीं दे रहे हैं।
आने वाले एपिसोड में, एक जबरदस्त और चौंकाने वाला मोड़ आ चूका है, जहां सारी हदों को लांघती करिश्मा एक कदम और आगे बढ़कर, इस बार तो सीधे प्रभात की जान ही खतरे में डाल देती है। करिश्मा ने अभी भी प्रभात को बंधक बना रखा है। प्रभात, करिश्मा के चंगुल से निकलने की कोशिश भी करता है और पल भर के लिए लगता है कि शायद वह कामयाब भी हो जाएगा, किन्तु जल्द ही उम्मीद ख़त्म हो जाती है और प्रभात, फिर से करिश्मा की पकड़ में आ जाता है।
इस बार उसके तेवर, पहले से कई ज्यादा खूंखार नज़र आते हैं। वह प्रभात पर बंदूक तानकर, मानों सब कुछ तहस-नहस करने के लिए तैयार खड़ी हो..। अब यह दृश्य देख, सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या वह सच में, प्रभात को मार डालेगी? या फिर, यह है डराने का कोई नया पैंतरा?
अब इतना को साफ़ है कि उसकी हर हरकत के पीछे कोई न कोई मकसद ज़रूर होता है। प्रभात करिश्मा का मोहरा है, जिसे वह हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है और यदि उसने प्रभात को खत्म कर दिया तो खेल ही खत्म हो जाएगा। उसे ज़िंदा रखकर करिश्मा, चौहान परिवार को अपनी मुट्ठी में कर सकती है।
दूसरी ओर, परिवार का हर सदस्य, चंद्रिका की हालत देखकर परेशान है। सभी को यह डर सता रहा है कि यदि चंद्रिका इसी तरह बेसुध रही, तो उसके स्वास्थ्य में सुधार की संभावना न के बराबर हो जाएगी। प्रभात के जाने से, वैसे ही परिवार सदमे में हैं और यदि चंद्रिका को भी खोना पड़ा, तो परिवार पूरी तरह से टूट कर बिखर जाएगा।
तभी कहानी एक नया मोड़ लेती है। चंद्रिका की सुध धीरे-धीरे वापस आने लगती है। धीरे-धीरे ही सही, पर बदलाव की एक आहट आने लगती है, जिससे उसकी सहज बुद्धि यह भांप लेती है कि उसके ‘सा’ यानी की प्रभात ज़िंदा हैं। यह भरोसा ही, वह चिंगारी है जिसकी इस वक़्त, परिवार को सबसे ज्यादा ज़रूरत है।
कहानी अब अपने नए रूप में ढलने लगती है। चंद्रिका की हालत में सुधार देख, एक बार फिर यह उम्मीद जागने लगती है कि, चंद्रिका जल्द ही अपने पुराने, रौबदार अवतार में लौट आएगी। तब तक के लिए, जिम्मेदारी वसुधा और देव के कंधों पर आ जाती है। वसुधा, जिसने स्वयं आगे होकर यह जिम्मेदारी संभालने की ठानी है इससे उसे मकसद के साथ एक साफ़ दिशा मिल जाती है।
दूसरी ओर देव उस मोड़ पर खड़ा है जहां प्रभात की खातिर वह अपना सब कुछ न्योछावर कर चूका है और अब उसे, अपनी की गई कुर्बानियों की सार्थकता साबित करनी होगी। घर का भेदी यदि घर में हो तो, सच तक पहुँचना मुश्किल हो जाता है। ‘घर का भेदी’ यानी घर में सारिका की मौजूदगी, कहानी को और ज्यादा पेचीदा बना देती है।
सारिका, जो कि अक्सर गलत लोगों का साथ देने के बावजूद भी बच निकलती है। आये दिन इस घटनाक्रम से, दर्शकों में नाराजगी देखने को मिलती है इसी उम्मीद के साथ कि पतन को कुछ समय के लिए रोका जा सकता है किन्तु टाला नहीं जा सकता, वह होकर ही रहता है।