भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग नीले से भगवा किए जाने से दुखी और आहत हूं : नवीन पटनायक

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भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग नीले से भगवा किए जाने से दुखी और आहत हूं : नवीन पटनायक

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  • Publish Date - July 30, 2026 / 08:20 PM IST,
    Updated On - July 30, 2026 / 08:20 PM IST

भुवनेश्वर, 30 जुलाई (भाषा) बीजू जनता दल (बीजेडी) के अध्यक्ष और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने बृहस्पतिवार को भारतीय हॉकी टीम की जर्सी के पारंपरिक नीले रंग को बदलकर भगवा किए जाने पर ‘गहरी पीड़ा’ व्यक्त की।

भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमें अगले महीने नीदरलैंड और बेल्जियम में होने वाले एफआईएच विश्व कप में अपनी पारंपरिक नीली जर्सी की जगह भगवा रंग की जर्सी में नजर आएंगी।

लगभग एक दशक पहले जब नवीन पटनायक ओडिशा के मुख्यमंत्री थे, तब ओडिशा सरकार भारतीय हॉकी टीम की प्रायोजक बनी थी।

हॉकी इंडिया द्वारा सोशल मीडिया पर नयी जर्सी जारी किए जाने के बाद पटनायक ने ‘एक्स’ पर एक लंबी पोस्ट में कहा, ‘‘यह जानकर मुझे गहरा दुख हुआ है कि भारतीय हॉकी टीम की जर्सी के ऐतिहासिक रंग को बदलकर भगवा कर दिया गया है। ’’

हॉकी इंडिया ने अपने सोशल मीडिया पेज पर नयी जर्सी का अनावरण करते हुए कहा कि जर्सी का डिजाइन और रंग एक कहानी बताने और भारत का गौरव दिखाने के लिये है ।

हॉकी इंडिया ने कहा कि केसरिया रंग साहस, बलिदान और जीत का प्रतीक है । इसने कहा ,‘‘भारत के राष्ट्रध्वज और उगते हुए सूरज से प्रेरित यह जर्सी नयी शुरूआत की प्रतीक है ।’’

हालांकि पटनायक ने इस बदलाव पर चिंता जताते हुए कहा, ‘‘भारतीय हॉकी टीम का प्रतिष्ठित नीला रंग सिर्फ एक रंग नहीं है। यह देश की खेल विरासत से जुड़ी भावना है। दशकों से इस रंग ने हमें उम्मीद, जीत, हार और खेल में उत्कृष्टता की तलाश में एकजुट किया है। ’’

हॉकी से अपने भावनात्मक जुड़ाव को याद करते हुए पटनायक ने कहा, ‘‘हम अपनी पुरुष और महिला टीमों के साथ रोए, हंसे, जश्न मनाया और गर्व से खड़े रहे। नीली जर्सी पहनकर हमारी टीमों ने दुनिया के मंच पर राष्ट्रगान बजते समय ओलंपिक पदक जीते हैं। ’’

स्कूल स्तर पर हॉकी टीम के गोलकीपर रह चुके पटनायक ने कहा, ‘‘नीला रंग हमारे राष्ट्रीय ध्वज के अशोक चक्र से लिया गया है। यह हमारे राष्ट्रीय गौरव और पहचान का प्रतीक है। नीला रंग हर भारतीय का है। ’’

पटनायक ने याद किया कि जब भारतीय हॉकी टीमों को प्रायोजक मिलने में परेशानी हो रही थी, तब ओडिशा ने इतिहास रचते हुए राष्ट्रीय टीम और इस प्रिय खेल का समर्थन करने वाला पहला और एकमात्र राज्य बनने का गौरव हासिल किया था।

उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया भर में हर ‘उड़िया’ (ओडिशा राज्य के वासी) को राष्ट्रीय हॉकी के लिए राज्य के इस योगदान पर गर्व था। 41 साल के लंबे इंतजार के बाद हमारी पुरुष टीम ने ओलंपिक पदक जीता। सिर्फ इसलिए कि ओडिशा में सरकार बदल गई है, हमारी राष्ट्रीय टीम की जर्सी का रंग नहीं बदलना चाहिए। यह बेहद निम्न स्तर की राजनीति है। ’’

नीली जर्सी के महत्व को बताते हुए पटनायक ने कहा, ‘‘हमारे लिए नीली जर्सी वही महत्व रखती है जो अर्जेंटीना की धारियों वाली जर्सी और ब्राजील की पीली जर्सी का है। यह हमारी यादों में बसी हुई है। इस रंग में बदलाव हमारी अमूल्य खेल विरासत को मिटाने का घटिया प्रयास है। राष्ट्रीय प्रतीक हमें जोड़ने के लिए होते हैं, बांटने के लिए नहीं। ’’

पटनायक ने दावा किया कि उन्हें जानकारी मिली है कि यह कदम ओडिशा की भाजपा सरकार के दबाव में उठाया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘सत्ता में बैठे लोग इससे इनकार कर सकते हैं, लेकिन पिछले दो वर्षों से ओडिशा में हर कोई इस सरकार की इमारतों, बसों और यहां तक कि पुलों के रंग बदलने की प्रवृत्ति देख रहा है। ’’

उन्होंने आरोप लगाया कि ओडिशा की भाजपा सरकार के तहत यही एकमात्र काम हो रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन अब उसी सरकार ने हमारी राष्ट्रीय टीम के रंग बदल दिए हैं। मैं हॉकी जैसे राष्ट्रीय खेल का राजनीतिकरण करने की भाजपा ओडिशा की इस कोशिश की कड़ी निंदा करता हूं। इसने देश भर के लाखों खेल प्रेमियों की भावनाओं को गहरी चोट पहुंचाई है और उस गर्व को भी ठेस पहुंचाई है जिसके साथ ओडिशा ने राष्ट्रीय हॉकी का समर्थन किया है।’’

भाषा नमिता सुधीर

सुधीर