नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) ऊंची जिंस कीमतें, सख्त मौद्रिक एवं राजकोषीय नीतियां और असामान्य रूप से गर्म एवं शुष्क मौसम की वजह से वर्ष 2026 और 2027 में एशिया-प्रशांत (एपीएसी) क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि दर धीमी पड़ सकती है। मूडीज़ एनालिटिक्स ने बृहस्पतिवार को यह अनुमान जताया।
मूडीज ने एक रिपोर्ट में कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष के बावजूद एशिया-प्रशांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्था अपेक्षित सुस्ती से बची रही है। कृत्रिम मेधा (एआई) से जुड़े निवेश और निर्यात में मजबूती ने हाल के समय में वृद्धि को सहारा दिया है।
हालांकि, मूडीज़ ने जिंसों की वैश्विक कीमतों के ऊंचे स्तर पर बने रहने, अमेरिकी शुल्कों से व्यापार को लेकर पैदा हो रही अनिश्चितता और सख्त नीतिगत रुख के असर को देखते हुए चेतावनी भी दी है।
रिपोर्ट कहती है कि इस परिदृश्य में एपीएसी क्षेत्र की वृद्धि दर 2025 के 4.3 प्रतिशत से घटकर 2026 में 4.1 प्रतिशत और 2027 में 3.6 प्रतिशत रह सकती है। एआई से मिलने वाला प्रोत्साहन धीरे-धीरे कम होने के कारण ऐसा होने की आशंका है।
रिपोर्ट में कहा गया कि पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पूरी तरह सामान्य होने में समय लग सकता है। इससे कच्चे तेल एवं अन्य जिंस कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है, जो महंगाई को बढ़ा रहा है।
मूडीज ने कहा कि हाल के महीनों में बढ़ती महंगाई ने एशियाई देशों के केंद्रीय बैंकों को सख्त रुख अपनाने पर मजबूर किया है। इंडोनेशिया, फिलिपीन, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में दरें बढ़ाई गई हैं या बढ़ाने के संकेत दिए गए हैं।
इसके अलावा, प्रतिकूल जलवायु स्थिति अल नीनो के प्रभाव से क्षेत्र में गर्म मौसम बढ़ सकता है, जिससे फसल उत्पादन और खाद्य आपूर्ति प्रभावित होने का जोखिम है। इससे खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका भी जताई गई है।
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