भारतीय आक्रमण को देखते हुए तेज गेंदबाजों के अनुकूल विकेट मिले सकते हैं : बर्न्स

भारतीय आक्रमण को देखते हुए तेज गेंदबाजों के अनुकूल विकेट मिले सकते हैं : बर्न्स

भारतीय आक्रमण को देखते हुए तेज गेंदबाजों के अनुकूल विकेट मिले सकते हैं : बर्न्स
Modified Date: November 29, 2022 / 08:02 pm IST
Published Date: January 28, 2021 3:25 pm IST

चेन्नई, 28 जनवरी (भाषा) इंग्लैंड के सलामी बल्लेबाज रोरी बर्न्स का मानना है कि विश्व के शीर्ष गेंदबाजों में शामिल जसप्रीत बुमराह की अगुवाई वाले भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण को देखते हुए आगामी टेस्ट श्रृंखला के लिये मेजबान टीम स्पिनरों के अनुकूल विकेटों के बजाय तेज गेंदबाजों को मदद पहुंचाने वाले विकेट तैयार करवा सकती है।

तीस वर्षीय बर्न्स ने इसके साथ ही कहा कि उनकी स्पिन जोड़ी ऑफ ब्रेक गेंदबाज डॉम बेस और बायें हाथ के स्पिनर जैक लीच पर दबाव नहीं बनाना चाहिए जिन्हें भारत की मजबूत बल्लेबाजी का सामना करना है।

बर्न्स ने गुरुवार को वर्चुअल संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘ईमानदारी से कहूं तो आपको उन पर उम्मीदों का बोझ नहीं लादना चाहिए। वे अपना काम करेंगे और उन्होंने श्रीलंका में गेंदबाजी की और अच्छी लय में हैं जो कि महत्वपूर्ण है और यह भारतीय पिचों के अनुकूल प्रदर्शन करने से जुड़ा है। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘वे पहले भी विभिन्न टीमों के साथ यहां का दौरा कर चुके हैं और इसलिए उन्हें यहां खेलने का अनुभव है। ’’

बर्न्स ने कहा, ‘‘पिच के बारे में जाने बिना आप उन पर अपेक्षाओं का बोझ नहीं डालना चाहते तथा भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण को देखते हुए हो सकता है कि विकेट थोड़ा तेज गेंदबाजों के अनुकूल हो। एक दिन रात्रि मैच भी होगा इसलिए यह (विकेट) थोड़ा भिन्न हो सकता है। ’’

बायें हाथ के इस बल्लेबाज ने स्वीकार किया कि बुमराह जैसे गेंदबाज के लिये तैयारी करना कड़ी चुनौती है।

उन्होंने कहा, ‘‘उसके लिये तैयारी करना वास्तव में चुनौतीपूर्ण है। वह जिस तरह से गेंदबाजी करता है वह सबसे अलग है। हम इन पहलुओं पर काम कर रहे हैं और जितना हो सके क्रीज पर इन्हें दोहराने की कोशिश करेंगे। ’’

इंग्लैंड की टीम को पांच दिन के पृथकवास के बाद केवल तीन दिन के अभ्यास का मौका मिलेगा। इस बल्लेबाज ने होटल के कमरे में शीशे के सामने छद्म बल्लेबाजी का अभ्यास किया। उन्होंने स्वीकार किया कि कोविड के बाद की दुनिया चुनौतीपूर्ण है।

बर्न्स ने कहा, ‘‘हां यह वास्तव में चुनौती है। हम इस कार्यक्रम के साथ कुछ नहीं कर सकते। इसके बारे में सोचना समय बर्बाद करना होगा और इससे कोई फायदा नहीं होने वाला है। ’’

भाषा पंत नमिता

नमिता


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