किसी के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं, एआईएफएफ सचिव सत्यनारायणन ने चौबे का बचाव किया

किसी के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं, एआईएफएफ सचिव सत्यनारायणन ने चौबे का बचाव किया

किसी के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं, एआईएफएफ सचिव सत्यनारायणन ने चौबे का बचाव किया
Modified Date: May 26, 2026 / 08:26 pm IST
Published Date: May 26, 2026 8:26 pm IST

(सुमन रे)

नई दिल्ली, 26 मई (भाषा) अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) के सचिव एम सत्यनारायणन ने अध्यक्ष कल्याण चौबे पर लगे भ्रष्टाचार के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए साफ तौर पर कहा कि ‘अभी तक कोई ठोस सबूत’ नहीं मिला है।

चौबे पर लगे आरोपों में महासंघ के कोष का निजी खर्चों के लिए गलत इस्तेमाल करने से लेकर निविदा प्रक्रिया में हेरफेर करने और प्रसारण अनुबंध किसी पसंदीदा कंपनी को देने तक के आरोप शामिल थे।

सत्यनारायणन ने मंगलवार को एआईएफएफ मुख्यालय में पीटीआई को दिए साक्षात्कार में कहा, ‘‘बेशक, हम हर बात (चौबे पर लगे आरोपों) को गंभीरता से लेते हैं। इन सभी मुद्दों पर एजीएम में खुलकर चर्चा हुई थी। और सदस्यों के अनुसार वहां कोई सबूत पेश नहीं किया गया। इसलिए सदस्यों को कोई भी दोषी नहीं मिला।’’

चौबे के भरोसेमंद सहयोगी ने साफ तौर पर कहा कि वह किसी भी ऐसे मामले पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे जो अभी अदालत में विचाराधीन है।

सत्यनारायणन ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि कुछ मामले अदालत में (लंबित) हैं। अदालत अपना फैसला देगी।’’

एआईएफएफ के महासचिव ने कहा कि एक संस्था के तौर पर उन्हें न्यायिक निकायों के कामकाज में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है।

भारत की फीफा रैंकिंग गिरकर 136 पर पहुंचने के कारणों पर जवाब देते हुए सत्यनारायणन ने कहा, ‘‘इसके कई कारण हैं। पहली बात तो यह है कि अगर आप पिछले विश्व कप क्वालीफायर को देखें तो हमें कम से कम अगले दौर तक तो पहुंच ही जाना चाहिए था। दूसरी बात, रैंकिंग कभी-कभी यह नहीं दिखाती कि टीम कैसा प्रदर्शन कर रही है। क्योंकि हमने एक मैच जीता इसलिए अपने पिछले मैच के बाद हम छह पायदान ऊपर चढ़ गए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘तीसरी बार, फीफा मैत्री मुकाबलों में बेहतर देश अन्य बेहतर देशों के खिलाफ खेलना चाहते हैं क्योंकि उन्हें अंक मिलते हैं।’’

एआईएफएफ महासचिव ने कहा, ‘‘चौथी बात, इस क्षेत्र के कुछ दूसरे देशों ने अपने विदेशी खिलाड़ियों को टीम में शामिल करना शुरू कर दिया है। उदाहरण के लिए, एक-दो ऐसे देश हैं जहां के कुछ खिलाड़ी कभी उस देश में गए भी नहीं हैं लेकिन वे उस देश के लिए खेल रहे हैं। ठीक वैसे ही जैसे हमारे ओसीआई (उदाहरण के लिए, रेयान विलियम्स) हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अन्य देशों को असल में इसका फायदा हुआ है। हाल ही में हुए अंडर-20 फाइनल में बांग्लादेश का ही उदाहरण ले लीजिए। उनके पास कुछ ऐसे खिलाड़ी थे जिनका जन्म और पालन-पोषण अमेरिका में हुआ था लेकिन वे बांग्लादेश के लिए खेल रहे थे।’’

भाषा सुधीर आनन्द

आनन्द


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