…जी उन्नीकृष्णन …
गॉल, 15 अगस्त (भाषा) लंबे अंतराल के बाद टेस्ट क्रिकेट में वापसी कर रहे देवदत्त पडिक्कल ने नाबाद 131 रन की शानदार पारी खेलकर अपनी बल्लेबाजी में आई परिपक्वता का परिचय दिया जिससे भारत ने श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट के शुरुआती दिन दो विकेट पर 288 रन बना कर अपनी स्थिति मजबूत कर ली। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 2024 में पर्थ में अपना पिछला टेस्ट खेलने वाले पडिक्कल ने 134 गेंदों में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय शतक पूरा किया। दिन का खेल खत्म होने तक वह 178 गेंदों में 12 चौकों और एक छक्के की मदद से 131 रन बनाकर नाबाद थे। उनके साथ ऋषभ पंत 27 रन पर खेल रहे थे और दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 52 रनों की अटूट साझेदारी कर ली थी। इससे पहले लोकेश राहुल 77 रन पर रिटायर हर्ट हुए। उन्होंने दूसरे विकेट के लिए पडिक्कल के साथ 150 रन जोड़े। इस साझेदारी में पडिक्कल ने लगातार आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंकाई गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा। उनकी पारी की शुरुआत भी तेज रही और शुरुआती 20 रन उन्होंने करीब 100 के स्ट्राइक रेट से बनाए, जिसके बाद उन्होंने थोड़ा संयम बरतना शुरू किया। खब्बू बल्लेबाज पडिक्कल के क्रीज पर आते ही पदार्पण कर रहे ऑफ स्पिनर केशरा नुवांथा को गेंदबाजी पर लगाया गया। बाएं हाथ के बल्लेबाज के खिलाफ ऑफ स्पिनर को उतारना रणनीतिक रूप से सही फैसला था, लेकिन श्रीलंका को इसका अपेक्षित फायदा नहीं मिला। नुवांथा ने पडिक्कल का बाहरी किनारा जरूर लगवाया, लेकिन गेंद स्लिप में खड़े एकमात्र क्षेत्ररक्षक के सामने ही गिर गई। इसके बाद 26 वर्षीय बल्लेबाज ने कोई गलती नहीं की और नुवांथा के खिलाफ पुल शॉट पर चौका जड़ दिया। श्रीलंका के प्रमुख बाएं हाथ के स्पिनर प्रभात जयसूर्या भी पडिक्कल को रोक नहीं सके। 81 गेंदों में अर्धशतक पूरा करने वाले पडिक्कल ने जयसूर्या की गेंद पर कदमों का इस्तेमाल करते हुए शानदार छक्का लगाया और फिर कवर के बीच से करारा चौका जड़ दिया। दूसरे छोर पर राहुल अपने चिर-परिचित बेहद संयमित अंदाज में बल्लेबाजी करते रहे और श्रीलंकाई गेंदबाजों के खिलाफ मजबूती से डटे रहे। उन्होंने 127 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया। वह बीच-बीच में अपने बेहतरीन शॉट्स की झलक भी दिखाते रहे। जयसूर्या की गेंद पर उनका सीधा छक्का खास तौर पर शानदार टाइमिंग और सटीकता के कारण आकर्षण का केंद्र रहा। शुरुआत में लाहिरू कुमारा की तेज गेंदों के खिलाफ राहुल कुछ असहज भी नजर आए। दिन की सबसे बड़ी चुनौती दोनों बल्लेबाजों के लिए बारिश के कारण करीब एक घंटे 20 मिनट के खेल में आयी रूकावट रही। इस ब्रेक के बाद भी श्रीलंकाई गेंदबाज इन दोनों को ज्यादा परेशान नहीं कर सके। आखिरकार अंतिम सत्र में राहुल को बांह में ऐंठन के कारण मैदान छोड़ना पड़ा। पडिक्कल को भी उमस भरे मौसम में दिन के अंतिम हिस्से में ‘डिहाइड्रेशन’ की समस्या हुई, लेकिन इसका उनकी बल्लेबाजी पर असर नहीं पड़ा। हाल के दिनों में सभी प्रारूपों में शानदार फॉर्म में चल रहे पडिक्कल ने पिछले सप्ताह कोलंबो में श्रीलंका एकादश के खिलाफ अभ्यास मैच में 142 रन बनाए थे। साई सुदर्शन के पैर के अंगूठे की चोट से समय पर नहीं उबर पाने के बाद पडिक्कल को भारतीय टीम में शामिल किया गया और उन्होंने इस मौके का पूरा फायदा उठाया। क्रीज पर पडिक्कल कभी जल्दबाजी में नजर नहीं आए। उन्होंने टाइमिंग और कदमों के बेहतरीन इस्तेमाल से स्पिनरों को प्रभावी नहीं होने दिया। स्पिनरों के खिलाफ उन्होंने स्वीप, पंच और स्क्वायर लेग के पीछे गेंद को मोड़ने जैसे कई आकर्षक शॉट्स से रन जुटाए। उन्होंने कुमारा की गेंद को मिडऑफ की ओर खेलकर दूसरा रन पूरा करते हुए अपना पहला टेस्ट शतक पूरा किया। भारतीय बल्लेबाजों के लगातार दबाव से परेशान श्रीलंका को अंततः एक सफलता जरूर मिली। जयसूर्या ने गेंद को हवा में धीमा रखते हुए शुभमन गिल को चकमा दिया। भारतीय कप्तान गेंद की पिच तक ठीक से नहीं पहुंच सके और हवा में खेलने का प्रयास सर्कल के किनारे खड़े लाहिरू उदारा के हाथों में जा पहुंचा। गिल 16 रन बनाकर आउट हुए। इससे पहले श्रीलंका को एकमात्र अन्य सफलता भी कुछ हद तक भारत के बल्लेबाजों के बीच तालमेल की कमी के कारण मिली थी। राहुल और यशस्वी जायसवाल ( 32 गेंद गेंद में 37 रन) के बीच रन लेने को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हुई और दोनों बल्लेबाज नॉन-स्ट्राइकर छोर पर पहुंच गए। गेंदबाज से टकराने के बाद संतुलन खोने वाले जायसवाल को आखिरकार पवेलियन लौटना पड़ा। इस विकेट के बावजूद भारतीय बल्लेबाजों की तकनीक और बल्लेबाजी के लिए आसान परिस्थियों ने श्रीलंका की तमाम रणनीतियों को बेअसर कर दिया। भाषा आनन्द नमितानमिता