(तस्वीरों के साथ)
वाराणसी / देहरादून, 13 जून (भाषा) भारत के दिग्गज पिस्टल निशानेबाज और कोच जसपाल राणा को अंतिम विदाई देने के लिए शनिवार को वाराणसी में सैकड़ों लोग नम आंखों के साथ जुटे। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए एयर एम्बुलेंस से वाराणसी लाया गया था।
राणा का बृहस्पतिवार को निधन हो गया था। वह 49 वर्ष के थे।
भारत के सर्वश्रेष्ठ पिस्टल निशानेबाजों में शुमार राणा ने खिलाड़ी के रूप में शानदार करियर के बाद कोचिंग में कदम रखा था। उनके मार्गदर्शन में ही मनु भाकर ने पेरिस ओलंपिक में दो कांस्य पदक जीते थे।
उनका पार्थिव शरीर शुक्रवार शाम दिल्ली से देहरादून लाया गया था। अंतिम दर्शन के लिए उसे उनके आवास पर रखा गया था। वाराणसी ले जाने से पहले राणा को उनके आवास पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पहुंचने पर भी उन्हें राजकीय सम्मान प्रदान किया गया। वहां उनके पुत्र युवराज ने अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कीं जिसमें इस दिग्गज निशानेबाज के भाई सुभाष, परिवार के अन्य सदस्य, निशानेबाजी जगत से जुड़े लोग और बड़ी संख्या में उपस्थित आमजन मौजूद थे।
परिवार के करीबी सूत्रों के अनुसार, राणा की भगवान शिव और मां गंगा में गहरी आस्था थी। उन्होंने अपने जीवनकाल में इच्छा व्यक्त की थी कि उनका अंतिम संस्कार वाराणसी में किया जाए।
मनु भाकर शुक्रवार को राणा के आवास पर उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंची थीं। वह काफी भावुक नजर आईं और उन्होंने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की।
राणा के निधन की खबर से देहरादून स्थित महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में चल रहे राष्ट्रीय निशानेबाजी शिविर में शोक की लहर दौड़ गई। मनु भी इस शिविर में हिस्सा ले रही हैं।
राणा के निधन के कारण शुक्रवार को होने वाले ट्रायल स्थगित कर दिए गए थे। उनका पार्थिव शरीर देहरादून पहुंचने के बाद कई निशानेबाज उनके आवास पर श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे।
शुक्रवार देर रात तक बड़ी संख्या में लोग उनके आवास पर जुटे रहे। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राणा के परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और उनके निधन को राज्य तथा देश के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
धामी ने कहा कि राणा की उपलब्धियां और उनका जज्बा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।
राणा के अंतिम दर्शन के लिए जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और खेल जगत से जुड़े अनेक लोग उनके आवास पहुंचे।
मनु ने शनिवार को अपने गुरु के निधन को ‘अपूरणीय क्षति’ बताया।
उन्होंने सोशल मीडिया पर जसपाल राणा के साथ अपनी कुछ तस्वीरें साझा करते हुए केवल दो शब्द लिखे—‘अपूरणीय क्षति’। यह उस कोच के प्रति उनकी भावुक श्रद्धांजलि थी, जिन्होंने उनके करियर के सबसे सफल दौर को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
भाषा पंत
आनन्द आनन्द नमिता
नमिता