छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। PCC चीफ भूपेश बघेल का आरोप है, कि कारोबारियों के ज़रिए बस्तर में तीन सौ करोड़ रुपए का तेंदूपत्ता घोटाला किया गया है, जिसमें सीएम रमन सिंह और वन मंत्री महेश गागड़ा की भूमिका संदिग्ध है। भूपेश का ये भी कहना है, कि सरकार को नक्सलियों से कोई ख़तरा नहीं है, क्योंकि सरकार.. घोटाले का पैसा उन्हे पहुंचा रही है। कांग्रेस का ये भी आरोप है, कि नक्सलियों से मिलकर सरकार.. बस्तर में चुनाव जीतना चाहती है, लिहाज़ा जानबूझकर चुनावी साल में कम दाम पर तेंदूपत्ता के टेंडर बुलाए गए, जिसमें तकनीकी गड़बड़ी है और क़रीब 34% नुकसान हुआ है। सरकार हर चुनावी साल में कारोबारियों के ज़रिए इसी तरह घोटाला करती है।
“चुनाव का चंदा जुटाने के लिए रमन सिंह ने एक और धांधली कर दी है. तेंदूपत्ता के गरीब मज़दूरों की पेट पर लात मारकर उन्होंने तेंदूपत्ता के टेंडर में 300 करोड़ का घोटाला कर दिया है. ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. 2013 के चुनाव के समय भी तेंदूपत्ता फेडरेशन को 284 करोड़ का नुक़सान हुआ था“
— Bhupesh Baghel
भूपेश ने नीलामी रद्द करने और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। इधर भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। वहीं छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के अधिकारियों ने भी कहा है, कि तेंदूपत्ता की टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी है। ई-नीलामी के ज़रिए अग्रिम विक्रय होता है। इस साल अग्रिम नीलामी में छत्तीसगढ़ को 5 हज़ार 8 सौ 47 रुपए की सबसे ऊंची दर मिली है। अधिकारियों का ये भी कहना है, कि लघु वनोपनज संघ की आमदनी में कमी होने की अटकलें निराधार हैं। छत्तीसगढ़.. तेंदूपत्ता संग्राहकों को ढाई हज़ार की दर से पारिश्रमिक देने वाला देश का पहला और इकलौता राज्य है। इसी के साथ शुक्रवार के दिन मुख्यमं
शुक्रवार को मुख्यमंत्री रमन सिंह ने पीसीसी चीफ भूपेश बघेल के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस सिर्फ और सिर्फ बेबुनियाद आरोपों का सहारा ले रही है। चुकिं कांग्रेस के पास दूसरा कोई काम बचा नहीं है इसलिए सिर्फ प्रेस कांफ्रेंस कर बेबुनियादी बातों को हवा देने का प्रयास किया जा रहा है।
वेब डेस्क, IBC24