कल का दिन छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए खास रहा पुरे 27 जिले में एक दिन के लिए दो कलेक्टर थे। जिसे सुन कर आश्चर्य जरूर हो रहा होगा लेकिन ये सच है। ये ऐसे युवा थे जो 528 युवाओं के साथ संघर्ष करके आगे आये थे। इस पुरे कार्यकर्म के सयोजक थे दान सिंह देवांगन उनका कहना है कि युवा को ये जानना जरुरी है की आखिर प्रशासन चलता कैसे है। इसलिए जरुरी है इन्हे सरकार चलती कैसे हैं ये जाने। यूथ ने चुनौती स्वीकारी बहुत बड़ा अचीवमेंट है।आइये जानते हैं एक दिन के कलेक्टर बने युवाओं के लिए कल का दिन कैसा रहा —
सबसे पहले हम जानेंगे रायपुर की शैडो कलेक्टर बनी श्रीकृति दीवान से कि कैसा रहा कल का दिन.- मुझे बहुत ज्यादा डर था लग रहा था कि मै रायपुर के कलेक्टर ओपी चौधरी सर से मिलने जा रही हु। कलेक्टर को देखने के बाद मुझे लग रहा है कि मैंने अपने ड्रीम को एक दिन के लिए जी लिया है।
महासमुंद की शैडो कलेक्टर रही हरप्रीत कौर के लिए कल का दिन बहुत अच्छा रहा वो कहती हैं कि मुझे कलेक्टर के अधिकारों ने एक्साइट किया तो जिम्मेदारी ने डराया भी। मुझे पहली बार समझने मिला कि टी एल मीटिंग और जनदर्शन कार्यक्रम कलेक्टर कैसे कंडक्ट करते हैं।
बिलासपुर एक दिन की कलेक्टर रही चेतना देवांगन के लिए कल का दिन लाइफ टाइम अचीवमेंट से कम नहीं था जैसे ही वो कलेक्ट्रेट पहुंची उन्हें सब स्टाफ खड़े होकर सम्मान देने लगे जैसी ही वे गेट पर पहुंची अर्दली ने उनका गेट खोला जिसे देखकर समझ आया की कलेक्टर की पोस्ट कितनी सम्मानी होती है।
प्रशांत जंघेल जांजगीर के कलेक्टर बने थे — उनका कहना है कि कलेक्टर बनना आसान नहीं होता जिस जिम्मेदारी को लेकर कलेक्टर कार्य करते हैं उसे समझने का कल मौका मिला। मुझे यकीन नहीं था की मैं एक दिन का कलेक्टर बनूँगा और जब मै कल पहली बार जैसी ही ऑफिस पंहुचा वो मेरी लाइफ का सबसे एक्ससाइटिंग हिस्सा था जब मैंने कलेट्रेट इंटर किया कलेक्टर से बहुत सी योजना को जानने का मौका मिला।
बस्तर जैसी हाई रिस्क एरिया की शैडो कलेक्टर बनी थी दीप्ती पैकरा -उन्होंने कल कलेक्टर के प्रोटोकॉल बहुत अच्छी तरह से समझने की कोशिश की और साथ ही सरकारी योजना के जो पेंडिंग काम पड़े थे उन्हें पूर्ण करने की अनुशंसा भी की।