Stock Market Next Week: क्या तेल की आग से सुलगेगा बाजार? क्या स्टॉक मार्केट को देगा बड़ा झटका या तेजी का आएगा तूफान?
Stock Market Next Week: ब्रेंट क्रूड 100 डॉलक के ऊपर बना हुआ है। ईरान-अमेरिका युद्ध के 14वें दिन तेल बाजार में उथल-पुथल दिख रही है। सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता से कीमतें चढ़ रही हैं। WTI क्रूड फ्यूचर्स करीब 6% उछलकर लगभग 96 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है।
(Stock Market Next Week/ Image Credit: IBC24 News)
- कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर के पार।
- मिडिल ईस्ट तनाव से तेल बाजार में उछाल।
- WTI क्रूड करीब 96 डॉलर प्रति बैरल।
नई दिल्ली: Stock Market Next Week: इस समय कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है, जो वैश्विक बाजारों के साथ-साथ भारत के घरेलू बाजार के लिए भी चिंता का कारण बन गया है। हाल के दिनों में तेल की कीमतों ने पिछले चार साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इसकी बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव और खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते पर पैदा हुई बाधाएं हैं। यह समुद्री मार्ग दुनिया में तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है। अगर यहां से सप्लाई प्रभावित होती है तो वैश्विक बाजार में तेल की कमी की आशंका बढ़ जाती है, जिससे कीमतों में तेजी आती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि हालात ऐसे ही बने रहे तो आने वाले समय में कच्चे तेल का भाव और ऊपर जा सकता है।
ब्रेंट और WTI क्रूड की कीमतों में तेजी
फिलहाल ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई है। मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-अमेरिका संघर्ष के 14वें दिन में प्रवेश करने के बाद तेल बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है। इसका असर सीधे कीमतों पर दिखाई दे रहा है। वहीं WTI क्रूड फ्यूचर्स में भी लगभग 6 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है और यह करीब 96 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। पिछले सप्ताह की शुरुआत में कच्चे तेल का भाव 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, हालांकि बाद में इसमें थोड़ी नरमी देखने को मिली। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं होता है, तो कीमतें दोबारा तेज रफ्तार पकड़ सकती हैं।
कहां तक जा सकता है कच्चा तेल
बाजार के जानकारों के मुताबिक अगर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है और सप्लाई प्रभावित होती है तो कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। ऐसी स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। खासकर तेल आयात करने वाले देशों पर इसका ज्यादा असर पड़ेगा। भारत जैसे देश, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करते हैं, उन्हें महंगे तेल की वजह से व्यापार घाटा और महंगाई दोनों का दबाव झेलना पड़ सकता है।
शेयर बाजार और सोना-चांदी पर असर
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर शेयर बाजारों पर भी दिखाई दे रहा है। मार्च के महीने में निफ्टी-50 इंडेक्स करीब 8% तक गिर चुका है। इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपया भी रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से बाजार पर दबाव बना हुआ है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आमतौर पर शेयर बाजार के लिए अच्छी खबर नहीं होती। वहीं सोने और चांदी की कीमतों पर इसका सीधा असर कम देखने को मिल सकता है। इसकी वजह डॉलर का मजबूत होना है, क्योंकि तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ती है और कई निवेशक सोने की बजाय डॉलर की ओर रुख करने लगते हैं।
नोट:- शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन होता है। शेयरों, म्यूचुअल फंड्स और अन्य वित्तीय साधनों की कीमतें बाजार की स्थितियों, आर्थिक परिस्थितियों और अन्य कारकों के आधार पर घट-बढ़ सकती हैं। इसमें पूंजी हानि की संभावना भी शामिल है। इस जानकारी का उद्देश्य केवल सामान्य जागरूकता बढ़ाना है और इसे निवेश या वित्तीय सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।
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