(Vedanta Aluminium Dividend/ Image Credit: AI-generated)
नई दिल्ली: Vedanta Aluminium Dividend: वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पहला अंतरिम डिविडेंड (Vedanta Aluminium Dividend) देने पर विचार कर रही है। गौरतलब है कि 1 मई 2026 को वेदांता का डिमर्जर लागू हुआ था, जिसके बाद कंपनी पांच अलग-अलग हिस्सों में बंट गई। इनमें से चार नई कंपनियां शेयर बाजार में लिस्ट हो चुकी है।
कंपनी ने जानकारी दी है कि 30 जुलाई 2026 को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की अहम बैठक होगी। इस बैठक में 30 जून 2026 को समाप्त हुई पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों पर चर्चा की जाएगी और उन्हें मंजूरी दी जा सकती है। इसके अलावा वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पहले अंतरिम डिविडेंड (Vedanta Aluminium Dividend) के प्रस्ताव पर भी फैसला लिया जाएगा।
वेदांता एल्युमीनियम ने डिविडेंड (Vedanta Aluminium Dividend) के लिए रिकॉर्ड डेट भी घोषित कर दी है। अगर बोर्ड बैठक में डिविडेंड को मंजूरी मिलती है तो 5 अगस्त 2026 को रिकॉर्ड डेट माना जाएगा यानी जिन निवेशकों के पास इस तारीख तक कंपनी के शेयर होंगे वे ही डिविडेंड पाने के योग्य होंगे। कंपनी ने सेबी के इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों के तहत ट्रेडिंग विंडो बंद रखने की जानकारी भी दी है।
वेदांता की डिमर्जर प्रक्रिया का अंतिम चरण जून 2026 में पूरा हुआ। इसके बाद डिमर्जर से बनी चार कंपनियों ने बीएसई और एनएसई पर कारोबार शुरू किया। वेदांता एल्युमीनियम मेटल के शेयरों ने एनएसई पर करीब 522 रुपये और बीएसई पर करीब 527 रुपये के भाव पर ट्रेडिंग शुरू की थी। इस कदम का उद्देश्य अलग-अलग कारोबार को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ाना है।
वेदांता एल्युमीनियम भारत की सबसे बड़ी एल्युमीनियम उत्पादक कंपनियों में शामिल है। कंपनी के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में उसने करीब 2.42 मिलियन टन एल्युमीनियम का उत्पादन किया था। कंपनी भारत के कुल एल्युमीनियम उत्पादन में बड़ी हिस्सेदारी रखती है और 60 से अधिक देशों में अपने उत्पादों की सप्लाई करती है। डिविडेंड के ऐलान की संभावना से कंपनी के निवेशकों की नजर अब 30 जुलाई की बोर्ड बैठक पर बनी हुई है।
नोट:-शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन होता है। शेयरों, म्यूचुअल फंड्स और अन्य वित्तीय साधनों की कीमतें बाजार की स्थितियों, आर्थिक परिस्थितियों और अन्य कारकों के आधार पर घट-बढ़ सकती हैं। इसमें पूंजी हानि की संभावना भी शामिल है। इस जानकारी का उद्देश्य केवल सामान्य जागरूकता बढ़ाना है और इसे निवेश या वित्तीय सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।
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