लखनऊ, नौ मई (भाषा) समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने एक बार फिर देश में मतपत्र के जरिए चुनाव कराने की मांग उठाई और ब्रिटेन में हाल में हुए चुनावों का हवाला देते हुए शनिवार को कहा कि भारत में भी मतपत्र से मतदान होना चाहिए।
लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में यादव ने कहा, “कल एक विकसित देश में चुनाव हुए। इंग्लैंड और ब्रिटेन में गुप्त मतदान मतपत्र के जरिए हुआ। जब अमेरिका, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देश मतपत्र से चुनाव करा सकते हैं, तो भारत में भी यह व्यवस्था लागू होनी चाहिए। यह समाजवादियों की पुरानी मांग है।”
उन्होंने कहा, “आपने (भारतीय जनता पार्टी की ओर इशारा करते हुए) हमें सिर्फ ईवीएम से हराया है। लेकिन हम उन्हें ईवीएम से ही फिर हराएंगे और सत्ता से हटाएंगे।”
अखिलेश यादव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ब्रिटेन में स्थानीय परिषदों तथा स्कॉटलैंड और वेल्स की संसदों के चुनावों में मतगणना जारी है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टॉर्मर ने शुक्रवार को स्थानीय चुनावों में लेबर पार्टी के खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी स्वीकार की थी।
यादव ने पार्टी कार्यकर्ताओं से संविधान और लोकतंत्र को मजबूत करने का आह्वान भी किया।
वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “हम सभी को बहुस्तरीय चुनाव माफिया से लड़ना होगा। लोकतंत्र, संविधान और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बचाने के लिए सबको मिलकर काम करना होगा।”
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और द्रमुक नेता एम के स्टालिन के साथ अपनी तस्वीर साझा किए जाने तथा सपा-कांग्रेस गठबंधन टूटने की अटकलों पर यादव ने कहा, “यह भाजपा की फैलायी नकारात्मकता है। भाजपा केवल विभाजन और संघर्ष की राजनीति करती है।”
सपा प्रमुख ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर पूंजीवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा, “भाजपा जितना पैसा चुनाव में खर्च कर सकती है, उतना कोई दल नहीं कर सकता। लेकिन इस बार जनता बदलाव लाएगी।”
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में केंद्रीय बलों की संभावित तैनाती पर उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश में जो केंद्रीय बल आएंगे, वे उत्तर-पूर्व और दक्षिण भारत से होंगे। बंगाल चुनाव में उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग वहां भेजे गए थे। पहली बार केंद्रीय बलों को चुनाव के बाद 15 दिन की छुट्टी दी गई है।”
भाजपा पर निशाना साधते हुए यादव ने कहा कि पार्टी के गठन के समय उसके भीतर इस बात पर बहस थी कि वह समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष रास्ते पर चलेगी या नहीं।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “भाजपा के गठन के समय पारित प्रस्तावों में समाजवादी विचारधारा और धर्मनिरपेक्षता की बात कही गई थी, लेकिन वास्तव में पार्टी सांप्रदायिक और पूंजीवादी साबित हुई। खुद को समाजवादी दिखाने के लिए उन्होंने सबसे पहले मंच पर जयप्रकाश नारायण की तस्वीर लगाई।”
तेल कंपनियों के घाटे का जिक्र करते हुए यादव ने कहा, “सरकारी तेल कंपनियों के घाटे का बोझ आखिरकार जनता पर डाला जाएगा। गैस सिलेंडर की कीमतें बढ़ाई जा चुकी हैं। सरकार नहीं, बल्कि आम लोग इसकी कीमत चुकाएंगे, क्योंकि मुनाफाखोरी कम नहीं होने दी जा रही है।”
भाषा
अरूनव, जफर रवि कांत