पंडित छन्नूलाल मिश्र ने वाराणसी का मुक्त जीवन जिया

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पंडित छन्नूलाल मिश्र ने वाराणसी का मुक्त जीवन जिया

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  • Publish Date - October 2, 2025 / 07:59 PM IST,
    Updated On - October 2, 2025 / 07:59 PM IST

लखनऊ, दो अक्टूबर (भाषा) देश के प्रख्यात शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र वाराणसी से प्यार करते थे और उन्होंने इस नगर के मुक्त जीवन को मंच और मंच से परे खुलकर जिया।

छन्नूलाल मिश्र का बृहस्पतिवार को मिर्जापुर में निधन हो गया।

संगीत प्रेमियों के चहेते शास्त्रीय गायक छन्नूलाल मिश्र एक कुशल अध्यापक भी थे जिन्होंने अपनी अद्वितीय शैली में संगीत सिखाया और मंच से श्रोताओं को अपना संदेश दिया। फलस्वरूप लोगों को शास्त्रीय संगीत की बारीकियों से जुड़ने में मदद मिली।

संयोग से लोगों के बीच पंडित जी या गुरु जी के रूप में लोकप्रिय छन्नूलाल मिश्र एक इंटर कॉलेज में पढ़ाया करते थे और बाद में उन्होंने स्वयं को पूरी तरह से गायन को समर्पित कर दिया था।

शीर्ष शास्त्रीय गायकों और कलाकारों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “पंडित जी मुस्कुराते और दर्शक अपनी लयबद्ध तालियों से उनका हौसला बढ़ाते। यही वजह है कि पंडित जी के कार्यक्रम के दौरान कभी नीरस क्षण नहीं रहा। उनका जाने से वाराणसी ने एक महान वैश्विक राजदूत खो दिया।”

प्रख्यात गायक स्वर्गीय राजन मिश्र के पुत्र और लोकप्रिय गायक पंडित रजनीश मिश्र ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि कैसे छन्नूलाल मिश्र अपनी प्रस्तुतियों में किस्सागोई का तत्व लाया करते थे।

उन्होंने बताया, “मैं सालों पहले वाराणसी में गंगा उत्सव में शामिल हुआ और मुझे अब भी याद है कि वहां जब पंडित ने “मसाने में होली” गीत गाया तो हर किसी के रोंगटे खड़े हो गए थे। उन्होंने अपने गायन से एक तस्वीर पेश कर दी थी कि कैसे भगवान शिव ने न केवल रंगों से बल्कि मसान की राख से होली खेली। उनकी प्रस्तुति याद करके आज भी मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं।”

प्रख्यात तबला वादक स्वर्गीय किशन महाराज के बेटे पूरन महाराज ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “पंडित जी ने बनारस को गौरवान्वित किया। वह जमीन से इतने जुड़े थे कि मुझे भी महाराज कहकर बुलाते थे। वह हर किसी से सहज भाव से मिलते.. भोजपुरी और बनारस के बारे में हर चीज से उन्हें प्यार था।”

उन्होंने कहा, “मेरे पिता ने पंडित जी के साथ कई बार तबला वादन किया और वह उनका एक कलाकार के तौर पर और एक व्यक्ति के तौर पर बहुत सम्मान करते थे।”

प्रख्यात शास्त्रीय गायक साजन मिश्र ने कहा, “पंडित जी के गायन से उनके व्यक्तित्व का पता चलता था। उनकी बहुमुखी प्रतिभा लाजवाब थी। ठुमरी, चैती के गायक की कमी हमेशा खलेगी।”

वाराणसी स्थित प्रोफेसर और गोरखपुर विश्वविद्यालय के ललित कला एवं संगीत विभाग के पूर्व अध्यक्ष 83 वर्षीय राजेश्वर आचार्य ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “आजमगढ़ में हरिहरपुर गांव से लेकर वैश्विक मंच तक उन्होंने शास्त्रीय संगीत को आम लोगों से जोड़ा। एक लोकप्रिय गायक के कारण उनकी कमी इसलिए भी बहुत खलेगी क्योंकि उन्होंने आम लोगों से जुड़कर विशुद्ध शास्त्रीय संगीत को सहजता के साथ गाया।”

‘हीलिंग थैरेपी’ के तौर पर संगीत का उपयोग करने वाली प्रख्यात गायिका डाक्टर रेवती सकलाकर ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “पंडित जी महज एक महान गायक नहीं थे, बल्कि एक महान व्यक्ति भी थे जिन्हें कभी गुस्सा नहीं आया।”

उन्होंने कहा, “मंच पर गायक और वादक के बीच हमेशा एक निश्चित तालमेल होता है। पंडित जी एक ऐसे महान व्यक्ति थे जो अपनी टीम की कमियों को ढ़कते भी थे।”

भाषा मनीष राजेंद्र

राजकुमार

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