राहुल गांधी नागरिकता विवाद: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने केंद्र को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया

राहुल गांधी नागरिकता विवाद: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने केंद्र को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया

राहुल गांधी नागरिकता विवाद: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने केंद्र को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया
Modified Date: March 19, 2026 / 11:37 pm IST
Published Date: March 19, 2026 11:37 pm IST

लखनऊ, 19 मार्च (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की नागरिकता के विवाद के मामले में बृहस्पतिवार को याचिकाकर्ता को इस मामले में केंद्र सरकार को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया।

इस मामले में सुनवाई शुरू होने पर केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एसबी पांडेय ने खुली अदालत में सुनवाई नहीं करने का अनुरोध किया क्योंकि गृह मंत्रालय से प्राप्त दस्तावेज अत्यधिक गोपनीय प्रकृति के हैं।

न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने उनका अनुरोध स्वीकार किया और चैंबर में इस मामले की सुनवाई की।

सुनवाई के बाद, अदालत ने गृह मंत्रालय के अवर सचिव विवेक मिश्रा और सहायक अनुभाग अधिकारी प्रणव राय को संबंधित रिकॉर्ड के साथ पेश होने का आदेश पारित किया। अदालत ने रिकॉर्ड की समीक्षा की और उसे अवर सचिव को लौटा दिया।

अदालत ने याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर को इस मामले में केंद्र सरकार को पक्षकार बनाने की अनुमति दी। हालांकि, अदालत ने इस मामले को “आंशिक रूप से सुने गए” मामले के तौर पर सूचीबद्ध करने के याचिकाकर्ता के अनुरोध को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह मामला अभी शुरुआती चरण में है। अगली सुनवाई छह अप्रैल को की जाएगी।

कर्नाटक से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ता एस. विग्नेश ने लखनऊ की सांसद/विधायक (एमपी/एमएलए) अदालत के 28 जनवरी, 2026 के आदेश को चुनौती देते हुए यह याचिका दायर की है। अधीनस्थ अदालत ने गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का उनका आवेदन खारिज कर दिया था।

याचिकाकर्ता ने राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और इस मामले की एक विस्तृत जांच का अनुरोध किया है। याचिकाकर्ता ने भारतीय नागरिक संहिता, पासपोर्ट अधिनियम और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत गांधी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं।

भाषा सं राजेंद्र सुरभि

सुरभि


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