rahul gandhi/ image source: IBC24
Rahul Gndhi on Noida Workers Protest: नोएडा: उत्तर प्रदेश के नोएडा में वेतनवृद्धि और अन्य मांगों को लेकर श्रमिकों का आक्रोश लगातार बना हुआ है, जिसका असर मंगलवार को भी देखने को मिला। विभिन्न इलाकों में श्रमिकों के जुटने की सूचना के बाद पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर नजर आए और स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी गई। गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) में हाल ही में हुए श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शन को लेकर पुलिस ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने मंगलवार को जानकारी देते हुए बताया कि इस मामले में अब तक 300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और कुल सात प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस लगातार सक्रिय है और सुबह 5 बजे से ही विभिन्न इलाकों में फ्लैग मार्च निकाले जा रहे हैं। मंगलवार सुबह श्रमिक तीन अलग-अलग स्थानों पर इकट्ठा हुए थे, लेकिन पुलिस ने तुरंत संवाद स्थापित कर उन्हें मात्र 15 मिनट के भीतर शांतिपूर्ण तरीके से वहां से हटा दिया।
कल नोएडा की सड़कों पर जो हुआ, वो इस देश के श्रमिकों की आख़िरी चीख़ थी – जिसकी हर आवाज़ को अनसुना किया गया, जो मांगते-मांगते थक गया।
नोएडा में काम करने वाले एक मज़दूर की ₹12,000 महीने की तनख्वाह,₹4,000-7,000 किराया। जब तक ₹300 की सालाना बढ़ोतरी मिलती है, मकान मालिक ₹500…
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) April 14, 2026
गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) में हाल ही में हुए श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया में सरकार को घेरा है, राहुल ने लिखा, ‘कल नोएडा की सड़कों पर जो हुआ, वो इस देश के श्रमिकों की आख़िरी चीख़ थी – जिसकी हर आवाज़ को अनसुना किया गया, जो मांगते-मांगते थक गया। नोएडा में काम करने वाले एक मज़दूर की ₹12,000 महीने की तनख्वाह,₹4,000-7,000 किराया। जब तक ₹300 की सालाना बढ़ोतरी मिलती है, मकान मालिक ₹500 सालाना किराया बढ़ा देता है। तनख्वाह बढ़ने तक ये बेलगाम महंगाई ज़िंदगी का गला घोंट देती है, कर्ज़ की गहराई में डुबा देती है – यही है “विकसित भारत” का सच। एक महिला मज़दूर ने कहा – “गैस के दाम बढ़ते हैं, पर हमारी तनख्वाह नहीं।” इन लोगों ने शायद इस गैस संकट के दौरान अपने घर का चूल्हा जलाने के लिए ₹5000 का भी सिलेंडर खरीदा होगा।
यह सिर्फ़ नोएडा की बात नहीं है। और यह सिर्फ़ भारत की भी बात नहीं है। दुनियाभर में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं – पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से सप्लाई चेन टूट गई है। मगर, अमेरिका के टैरिफ़ वॉर, वैश्विक महंगाई, टूटती सप्लाई चेन – इसका बोझ Modi जी के “मित्र” उद्योगपतियों पर नहीं पड़ा। इसकी सबसे बड़ी मार पड़ी है उस मज़दूर पर जो दिहाड़ी कमाता है, तभी रोज़ खाता है। वो मज़दूर, जो किसी युद्ध का हिस्सा नहीं, जिसने कोई नीति नहीं बनाई – जिसने बस काम किया। चुपचाप। बिना शिकायत। और उसके बदले अपना हक मांगने पर उन्हें मिलता क्या है? दबाव और अत्याचार। एक और ज़रूरी मुद्दा – मोदी सरकार ने 4 लेबर कोड जल्दबाज़ी में बिना संवाद नवंबर, 2025 से लागू कर, काम का समय 12 घंटे तक बढ़ा दिया। जो मज़दूर हर रोज़ 12-12 घंटे खड़े होकर काम करता है फिर भी बच्चों की स्कूल फ़ीस क़र्ज़ लेकर भरता है – क्या उसकी मांग ग़ैरवाजिब है? और जो उसका हक़ हर रोज़ मार रहा है – वो “विकास” कर रहा है? नोएडा का मज़दूर ₹20,000 माँग रहा है। यह कोई लालच नहीं – यह उसका अधिकार, उसकी जिंदगी का एकमात्र आधार है। मैं हर उस मज़दूर के साथ हूं – जो इस देश की रीढ़ है और जिसे इस सरकार ने बोझ समझ लिया है।
उत्तर प्रदेश के नोएडा में वेतनवृद्धि और अन्य मांगों को लेकर श्रमिकों का आक्रोश लगातार बना हुआ है, जिसका असर मंगलवार को भी देखने को मिला। विभिन्न इलाकों में श्रमिकों के जुटने की सूचना के बाद पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर नजर आए और स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी गई। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करते हुए लगातार गश्त और फ्लैग मार्च किया जा रहा है, ताकि किसी भी तरह की अशांति को रोका जा सके। इस बीच योगी आदित्यनाथ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए एक हाई पावर कमिटी गठित कर दी है, जो श्रमिकों की मांगों और पूरे घटनाक्रम की विस्तृत समीक्षा कर समाधान की दिशा में काम करेगी।
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