श्रीकृष्ण जन्मस्थान में दान प्रबंधन की सीबीआई जांच की मांग, न्यास ने आरोपों को बताया निराधार

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श्रीकृष्ण जन्मस्थान में दान प्रबंधन की सीबीआई जांच की मांग, न्यास ने आरोपों को बताया निराधार

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  • Publish Date - June 17, 2026 / 01:09 PM IST,
    Updated On - June 17, 2026 / 01:09 PM IST

मथुरा (उप्र), 17 जून (भाषा) श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के एक सदस्य ने मथुरा स्थित मंदिर में दान के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए बुधवार को मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से (सीबीआई) जांच कराने की मांग की और दावा किया कि अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान से जुड़े कथित गबन जैसी स्थिति यहां भी हो सकते हैं।

ये आरोप ऐसे समय सामने आए हैं, जब अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान के कथित गबन के मामले में तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) जांच कर रहा है।

दिनेश फलाहारी महाराज ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखे पत्र में आरोप लगाया कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई जाने वाली दान राशि और आभूषणों का वर्षों से दुरुपयोग किया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि दान की गिनती के दौरान सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए जाते हैं। उनका दावा है कि समिति के कुछ सदस्यों ने निजी संपत्ति अर्जित की है, जिससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं।

फलाहारी महाराज ने कहा, ‘‘हमें आशंका है कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान में भी इसी (श्रीराम जन्मभूमि मंदिर) तरह की अनियमितताएं हो रही हैं। मामले की सीबीआई जांच कराई जानी चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांग स्वीकार नहीं की गई तो वह इलाहाबाद उच्च न्यायालय का रुख करेंगे।

वहीं, आरोपों को खारिज करते हुए श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने कहा कि मंदिर में दान के प्रबंधन के लिए पूरी तरह पारदर्शी व्यवस्था अपनाई जाती है और संस्थान किसी भी जांच के लिए तैयार है।

शर्मा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ये आरोप निराधार हैं। हम किसी भी जांच के लिए तैयार हैं।’’

उन्होंने बताया कि दान की गिनती की प्रक्रिया तीन कर्मचारियों की मौजूदगी में सीसीटीवी निगरानी के तहत की जाती है और इस कार्य में लगे कर्मचारियों की समय-समय पर अदला-बदली भी की जाती है।

उन्होंने कहा कि सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखी जाती है।

शर्मा ने कहा, ‘‘हम व्यवस्था को और आधुनिक बना रहे हैं तथा सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की व्यवस्था की जा रही है।’’

उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर के बाहर कोई दान काउंटर नहीं है और सारा चढ़ावा मंदिर परिसर के भीतर ही स्वीकार किया जाता है।

शर्मा ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा जांच से गुजरना होता है और उन्हें पर्स, माला, प्रसाद या मोबाइल फोन भीतर ले जाने की अनुमति नहीं होती, जिससे किसी व्यक्ति के लिए बड़ी मात्रा में नकदी या आभूषण अंदर ले जाना मुश्किल हो जाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर की ओर से 5,000 रुपये से अधिक का नकद भुगतान नहीं किया जाता है और दान प्रबंधन को लेकर आयकर विभाग की ओर से कोई नोटिस भी नहीं मिला है।

भाषा सं जफर खारी

खारी