उत्तर प्रदेश देश का सिरमौर, जिधर देखेंगे वहां ऊर्जा मिलेगी: नरेंद्र सिंह तोमर

उत्तर प्रदेश देश का सिरमौर, जिधर देखेंगे वहां ऊर्जा मिलेगी: नरेंद्र सिंह तोमर

  •  
  • Publish Date - January 20, 2026 / 08:17 PM IST,
    Updated On - January 20, 2026 / 08:17 PM IST

लखनऊ, 20 जनवरी (भाषा) मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने मंगलवार को कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सिरमौर है और जिस तरफ भी नजर डालेंगे वहां के कण- कण से ऊर्जा प्राप्त होगी।

उप्र विधानभवन में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन के दूसरे दिन मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने अपने संबोधन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रयासों और उप्र विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के नये प्रयोगों की सराहना की।

तोमर ने कहा, ‘‘आज निश्चित रूप से हम सबके लिए प्रसन्नता का क्षण है कि जब उप्र के इस ऐतिहासिक विधानभवन में हम लोग अपनी बात रखने के लिए एकत्र हुए हैं।’’

उन्‍होंने कहा कि ”उप्र देश का सिरमौर है। जिस तरफ भी देखेंगे तो उप्र के कण-कण से ऊर्जा प्राप्त होती है।”

तोमर ने कहा कि “मुझे प्रसन्नता है कि जिस प्रकार उप्र का महत्व देश में है और जिस उप्र ने अनेक भारत रत्न और अनेक प्रधानमंत्री दिए, उस उप्र की धरती पर उप्र विधान सभा की टीम ने सतीश महाना के नेतृत्‍व में हम सबकी मेजबानी की, उसके लिए कृतज्ञता ज्ञापित करता हूं।”

लोकसभा अध्यक्ष की मौजूदगी में तोमर ने कहा कि “बिरला जी जबसे लोकसभा अध्यक्ष बने हैं, तब से लगातार राज्यों की विधानसभा की सक्रियता, क्षमता, संपर्क बढ़े और लोकसभा से सम्बद्ध रखते हुए अपने राज्‍य के विधानमंडलों में कीर्तिमान बनाएं, इसके लिए उनकी जितनी प्रशंसा की जाए कम ही है।”

उन्‍होंने कहा कि “विधायिका की जनता के प्रति जवाबदेही का विषय हो, या कुशल पारदर्शी नागरिक केंद्रित तकनीक जैसे जिन महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिए यह सम्मेलन आयोजित किया गया है, वह आने वाले कल में सिद्धांत के रूप में देश के उपयोग में आयेगा।”

उन्‍होंने आजादी का महत्व बताते हुए कहा कि यह विधानसभाओं की जिम्मेदारी है कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हम सब अपने पूर्वजों के संघर्ष और बलिदान को सहेज कर रखें और उसका भान कराएं।

उन्‍होंने चुनावी विसंगतियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि ”आजकल चुनावों की ऐसी स्थिति हो गई है कि किसी भी प्रकार से चुनावों में टिकट प्राप्त हो, टिकट मिले तो किसी प्रकार से जीतें, जीतने के लिए किसी भी सीमा पर जाना पड़े, स्वाभाविक रूप से चुनाव होंगे तो जो भी लड़ेगा जीतने के लिए लड़ेंगा, लेकिन उसमें भी अर्न्‍तमापदंड स्‍थापित होंगे तो हम लोकतंत्र को और भी खूबसूरत बना सकेंगे। जवाबदेही को और ज्यादा सुनिश्चित करने में सफल हो सकेंगे।”

भाषा

आनन्द रवि कांत