उप्र : रमजान के पहले जुमे की नमाज के लिए जिलों में तैयारियां जोरों पर

उप्र : रमजान के पहले जुमे की नमाज के लिए जिलों में तैयारियां जोरों पर

उप्र : रमजान के पहले जुमे की नमाज के लिए जिलों में तैयारियां जोरों पर
Modified Date: February 19, 2026 / 10:33 pm IST
Published Date: February 19, 2026 10:33 pm IST

लखनऊ, 19 फरवरी (भाषा) रमजान के पाक महीने की बृहस्पतिवार को शुरुआत हो गयी। प्रशासन द्वारा शुक्रवार को इस रमजान की पहली जुमे की नमाज की तैयारियों के बीच सरकार ने मस्जिदों से लाउडस्पीकर के जरिये ऐलान किये जाने को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।

वहीं, ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष शहाबउद्दीन रजवी ने भी बोर्ड परीक्षाओं के मद्देनजर लाउडस्पीकर की आवाज धीमी रखने की हिमायत की है।

रमजान के महीने की शुरुआत की पूर्व संध्या पर प्रदेश की विभिन्न मस्जिदों में तरावीह की नमाज का सिलसिला शुरू हो गया। राज्य सरकार द्वारा सड़कों पर नमाज पढ़ने पर स्पष्ट निर्देश दिये जाने के बाद यह पहला रमजान है। शुक्रवार को इस साल रमजान की पहली जुमे की नमाज को लेकर भी विभिन्न जिलों में तैयारियां की जा रही हैं।

बरेली से प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक, आला हजरत दरगाह के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि जुमे की नमाज के लिये शहर की सभी मस्जिदों में तैयारी की जा रही है।

उन्होंने कहा कि सभी जगह ऐसे इंतजाम किये जा रहे हैं कि लोगों को सड़क पर नमाज न पढ़ना पड़े। उन्होंने कहा कि जरूरी होने पर दो बार जुमे की नमाज अदा की जाएगी।

इस बीच, ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबउद्दीन रजवी ने बोर्ड परीक्षाओं के मद्देनजर मस्जिदों से लाउडस्पीकर के सीमित इस्तेमाल का आग्रह किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘गैर जरूरी तौर पर लाउडस्पीकर ना बजायें, इससे बच्चों को पढ़ने में परेशानी होती है। इसके अलावा दूसरे तबकों के संगठन के लोग भी विरोध करते हैं। लिहाजा किसी तरह के विवाद से बचने और बच्चों को भी परेशानी न हो इसलिये एहतियात करें।’’

सड़क पर नमाज पढ़ने पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लगायी गयी पाबंदी के बारे में रजवी ने कहा कि आमतौर पर ईद में ही सड़क पर नमाज पढ़ने की मजबूरी होती है। उन्होंने कहा कि तरावीह में ऐसी भीड़ नहीं होती है कि सड़क पर नमाज पढ़ने की नौबत आये।

इधर, उत्तर प्रदेश सरकार ने रमजान के महीने में ‘सहरी’ और ‘इफ्तार’ के वक्त मस्जिदों से लाउडस्पीकर के जरिये ऐलान के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि ऐलान की यह परम्परा उस वक्त की है जब घड़ियों का चलन नहीं था और उच्चतम न्यायालय ने लाउडस्पीकर बजाने की अवधि पर स्पष्ट आदेश दिये हैं, जो लागू हैं।

विधानसभा में समाजवादी पार्टी (सपा) के सदस्य कमाल अख्तर ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि रमजान में सहरी (रोजे से पहले सुबह का भोजन) और इफ्तार (रोजा तोड़ने के लिये ग्रहण किया जाने वाला भोजन) के समय रोजेदारों को सहरी और इफ्तार के समय के बारे में बताने के मकसद से कुछ मिनटों के लिये मस्जिदों से ऐलान किया जाता है।

अख्तर ने कहा कि पिछले दिनों सरकार की तरफ से ज्यादातर धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटवा दिए गए हैं, ऐसे में सरकार से अनुरोध है कि रमजान के महीने को देखते हुए अगर सरकार पूरे प्रदेश में मस्जिदों से ऐलान करने की अनुमति दे दे तो लोगों को बहुत राहत मिलेगी।

वित्त मंत्री एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने इस पर कहा कि यह उच्चतम न्यायालय का आदेश है कि रात में 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं किया जाए।

खन्ना ने सहरी और इफ्तार के समय मस्जिदों से ऐलान की परंपरा का जिक्र करते हुए कहा, ”यह परंपरा तब की है जब घड़ी नहीं हुआ करती थी। लोग पहले धूप की दिशा देखकर समय का आकलन करते थे। आजकल हर व्यक्ति के पास चाहे वह रिक्शा वाला हो, ठेले वाला हो, सब्जी वाला हो, कमजोर से कमजोर आदमी के पास मोबाइल फोन है और उसमें समय भी दिखता है तो अब आवश्यकता तो है नहीं।”

मुरादाबाद से प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक, अपर पुलिस अधीक्षक कुंवर रणविजय सिंह ने बताया कि रमजान से पहले एक समन्वय समिति की बैठक की गई थी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि तरावीह की नमाज शांतिपूर्ण तरीके से हो।

भाषा सं सलीम शफीक

शफीक


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