(ज्डेंका सोकोलिकोवा और एलिजाबेथ कूपर, ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय ; क्रिस्टी हेहिर, सरे विश्वविद्यालय)
ग्रोनिंगन(नीदरलैंड), 26 जुलाई (द कन्वरसेशन) ‘‘विशाल ग्लेशियर को टूटकर गिरते देख मन भर आता था, लेकिन पर्यटक इसे देखकर खुशी से तालियां बजाते थे। तब यही लगता था कि क्या वे इस भयावह स्थिति की गंभीरता को समझ नहीं पा रहे हैं?’’
ये शब्द अंटार्कटिका के एक पूर्व पर्यटन गाइड के हैं, जिनका हमने साक्षात्कार लिया था। प्रकृति में रुचि रखने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए, शायद ही कोई नौकरी इससे बेहतर हो सकती है। आप पेंगुइन, ओर्का (घातक व्हेल) और ग्लेशियर के बीच महीनों बिताते हैं और पर्यटकों को दुनिया की सबसे अनोखी और अछूती जगहों में से एक का अनुभव करने में मदद करते हैं।
लेकिन कुछ गाइड के लिए, जैसे कि वे, जिनका जिक्र हमने इस लेख में किया है यह पेशा धीरे-धीरे उनके विचारों से समन्वय स्थापित नहीं कर पा रहा था। हजारों और पर्यटकों को उस महाद्वीप तक पहुंचने में मदद करते हुए जलवायु परिवर्तन को होते देखना, आखिरकार उन्हें इस पेशे को छोड़ने पर मजबूर कर दिया, जिनका उन्होंने कभी सपना देखा था।
अंटार्कटिक में पर्यटन तेज़ी से बढ़ रहा है। वर्ष 2025-26 में यहां 1,20,000 से अधिक पर्यटक आएं और उम्मीद है कि अगले एक दशक में हर गर्मी के मौसम में यहां आने पर्यटकों की संख्या 4,50,000 तक पहुंच जाएगी। हमारी नया अध्ययन इंगित करता है कि अंटार्कटिक पर्यटन गाइड अपने काम से जुड़ी एक बड़ी दुविधा का सामना कर रहे हैं। एक ओर वे पर्यावरण के लिहाज़ से संवदेनशील इलाके में अधिक से अधिक लोगों को लाते हैं, वहीं दूसरी ओर वे पर्यटक के किसी भी दूसरे रूप के मुकाबले सबसे अधिक कार्बन डाई ऑक्ससाइड के उत्सर्जन में योगदान देते हैं।
‘‘मैं 2020 में रिकॉर्ड किए गए सबसे गर्म दिन वहां मौजूद था। मैं टी-शर्ट पहनकर ग्लेशियर पर चढ़ रहा था और बिना दस्ताने पहने नौका परिचालित कर रहा था। यह सचमुच दुखद था। जलवायु परिवर्तन का असर साफ-साफ दिखाई दे रहा था।”
हमने अंटार्कटिक के 25 पूर्व गाइड का साक्षात्कार लिया, जिन्होंने अपनी नौकरी छोड़ने का फैसला किया था। ये गाइड रोजाना पर्यटन के जो असर देख रहे थे, उनसे वे अपने नैतिक मूल्यों का तालमेल नहीं बिठा पा रहे थे।
‘‘अक्सर, लंबे समय तक, पेंगुइन को रात के दौरान शायद केवल कुछ घंटों का ही आराम मिल पाता था। बाकी समय सैकड़ों लोग बेरोक-टोक लगातार उनकी बस्तियों के बीच से आते-जाते रहते थे।’’
हालांकि टूर ऑपरेटर का दावा होता है कि अंटार्कटिका की यात्रा पर्यटकों को पर्यावरण संबंधी समस्याओं के प्रति अधिक जागरूक बनाती है, लेकिन पूर्व गाइड इस बात से आश्चर्यचकित थे कि अधिकांश पर्यटक मानव गतिविधियों के पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों से कितने अनजान थे।
कोई भी गाइड रातों-रात काम छोड़कर नहीं गया। उन्होंने इस पेशे को छोड़ने का फैसला बरसों के सोच-विचार, अनिश्चितता और नैतिक द्वंद्व के बाद लिए।
‘‘हमारे मन में हमेशा दो बातों को लेकर द्वंद्व रहता है। अंटार्कटिका जैसी दूर-दराज और पसंदीदा जगहों पर जाकर काम करने का उत्साह, और दूसरी ओर पर्यटन उद्योग के विकास में शामिल होने का एहसास।’’
‘‘मैं अब जलवायु परिवर्तन ‘क्रूज टूरिज़्म’ के इस दिखावे में काम नहीं कर सकता। बात सिर्फ यह है कि मैं वहां जाकर लोगों को जलवायु परिवर्तन के बारे में बताऊं और उसके लिए कुछ न करूं, ऐसा कैसे हो सकता है?’’
अंटार्कटिका के पूर्व टूर गाइड के मुताबिक सार्थक बदलाव अक्सर एक ही बार में होने वाली कोई नाटकीय घटना नहीं, बल्कि एक धीरे-धीरे होने वाली प्रक्रिया होती है। कई लोगों के लिए, वर्षों तक अपने मूल्यों के खिलाफ काम करने का असर उनकी सेहत और खुशहाली पर पड़ा।
‘‘मेरे लिए असल बात यह है कि अगर मैं अपनी मौत के समय के बारे में सोचूं और अपने बच्चों की आंखों में देखकर कहूं कि ‘मैंने कोशिश की थी’, तो मुझे नहीं लगता कि अगर मैं वही काम करता रहता जो मैं कर रहा था, तो मैं ऐसा कह पाता।’’
दुनिया की सबसे अनोखे पर्यटन पेशे में से एक को छोड़ने वाले गाइड की कहानियां यह साफ तौर पर दिखाती हैं कि टिकाऊ न रहने वाली जीवनशैली को छोड़ने की व्यक्तिगत कीमत चुकानी पड़ सकती है।
‘‘आज भी, अंटार्कटिका मेरे ज़ेहन में एक ऐसी बेहद बेदाग़ और कुदरती जगह के तौर पर बसा है, जिसे पूरी देखभाल और सुरक्षा की ज़रूरत है। मुझे लगता है कि वहां पर्यटन और हमारा जाना, ठीक इसके उलट काम कर रहा था।’’
कई शोधार्थियों को अब भी अंटार्कटिका से गहरा लगाव महसूस होता है, और कभी-कभी उन्हें वहां से लौटने का अफसोस भी होता है। मिली-जुली भावनाएं और अनिश्चितता उन फैसलों का एक अंतर्निहित हिस्सा हैं जो हम दूरस्थ वातावरण सहित दूसरों के प्रति चिंता और देखभाल से प्रेरित होकर लेते हैं।
प्रेम करना और उसे छोड़ देना
जिन लोगों का हमने साक्षात्कार लिया, उनके लिए अंटार्कटिका की परवाह करने का अभिप्राय था अंटार्कटिक पर्यटन से दूर हो जाना। सक्षात्कार से इंगित होता है कि दूरी से ज़िम्मेदारी कमज़ोर नहीं होती। इन पूर्व टूर गाइड के लिए, अंटार्कटिका की देखभाल करने का अभिप्राय था उसे छोड़ देना – और नौकरी छोड़ने के बाद कई लोगों को बेहतर महसूस हुआ। कभी-कभी, जिस जगह से आप प्यार करते हैं, उसकी सुरक्षा का सबसे अच्छा तरीका यही होता है कि उसे अपने हाल पर छोड़ दिया जाए।
(द कन्वरसेशन)
धीरज सुभाष
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