CM Cashless Medical Scheme for Teachers: शिक्षकों को अब मिलेगा इतने लाख का मुफ्त इलाज, सीएम योगी ने किया ‘मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना’ का शुभारंभ

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  • Publish Date - July 26, 2026 / 05:52 PM IST,
    Updated On - July 26, 2026 / 05:52 PM IST

CM Cashless Medical Scheme for Teachers/Image Credit: @myogiadityanath

CM Cashless Medical Scheme for Teachers: लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बदलते दौर में शिक्षकों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। उन्हें छात्रों को सच और झूठ में अंतर पता करना, सोशल मीडिया के दुष्प्रचार से बचने का तरीका और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी नई तकनीकों का जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग भी सिखाना होगा। सोशल मीडिया व एआई आज की जरूरत हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल समाज व देशहित में होना चाहिए। भारत विरोधी ताकतें इन्हीं माध्यमों का दुरुपयोग कर समाज में भ्रम, विद्वेष और अव्यवस्था फैलाने का प्रयास कर रही हैं, इसलिए शिक्षण संस्थानों को युवाओं को जागरूक करने के लिए आगे आना होगा।

सीएम योगी ने किया ‘मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना’ का शुभारंभ

मुख्यमंत्री रविवार को डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा में उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों एवं उनके आश्रितों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने वाली ‘मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना’ के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग और पंजाब नेशनल बैंक के बीच शिक्षकों को सामाजिक सुरक्षा कवच उपलब्ध कराने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर भी किए गए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का स्वागत ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधा भेंटकर किया गया। मुख्यमंत्री ने गुरु पूर्णिमा के ठीक पहले उच्च शिक्षण संस्थानों के सभी प्राध्यापकों को यह सुविधा प्राप्त होने पर बधाई दी।

सीएम ने कहा कि कैशलेस चिकित्सा सुविधा के माध्यम से विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों चाहे वे राजकीय हों, शासकीय सहायता प्राप्त अशासकीय महाविद्यालय हों अथवा स्ववित्तपोषित प्रबंधन के अंतर्गत संचालित विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय हों, सभी को इस योजना के अंतर्गत शामिल किया जा रहा है। इसके साथ ही शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी इस योजना से जोड़ा जा रहा है। प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये की कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने वाली इस योजना से लगभग 10 लाख लोग आच्छादित होंगे।

पंजाब नेशनल बैंक के साथ किया MOU

मुख्यमंत्री ने कहा कि कैशलेस चिकित्सा सुविधा के साथ ही पंजाब नेशनल बैंक के साथ एक एमओयू भी किया गया है, जो शिक्षकों को सामाजिक सुरक्षा की अतिरिक्त गारंटी प्रदान करेगा। इस एमओयू के अंतर्गत दुर्भाग्यवश किसी शिक्षक के साथ कोई दुर्घटना या स्थायी विकलांगता जैसी अप्रत्याशित घटना होने की स्थिति में परिवार को पंजाब नेशनल बैंक द्वारा इस योजना के माध्यम से 1.5 करोड़ से लेकर 3 करोड़ रुपये तक की सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी। 60,000 रुपये तक की हॉस्पिटल कैश सुविधा तथा 12 लाख रुपये तक का टर्म लाइफ बीमा कवर भी इस योजना के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है। कोई भी व्यक्ति दुर्घटना की चपेट में आ सकता है। ऐसे समय में व्यक्ति या उसके परिवार के साथ सिस्टम, शासन और बैंकिंग व्यवस्था खड़ी रहे। इसी उद्देश्य से आज दो प्रकार की महत्वपूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह पंजाब नेशनल बैंक से यह भी आग्रह करेंगे कि स्ववित्तपोषित एवं निजी विश्वविद्यालयों के शिक्षकों को भी इस योजना के दायरे में लाने की व्यवस्था की जाए। अभी तक इस व्यवस्था में शिक्षणेत्तर कर्मचारी शामिल नहीं थे, लेकिन अब उच्च शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों में कार्यरत लगभग 50 हजार शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी इस व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं।

शिक्षक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की परंपरा में शिक्षक का स्थान प्राचीन काल से ही सर्वोच्च रहा है। जब दुनिया अंधकार में जी रही थी, तब भारत तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविख्यात विश्वविद्यालयों का संचालन कर रहा था। शिक्षकों की भूमिका केवल पढ़ाने की नहीं, बल्कि विद्यार्थी को दिशा देने, उसके भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानने और उसे सही मार्ग पर आगे बढ़ाने की है। परिवर्तन तभी आएगा, जब पहले दिन से ही शिक्षक व छात्र के बीच सार्थक संवाद होगा। भारतीय परंपरा में इसी कारण गुरु को सर्वोच्च स्थान दिया गया है, ताकि वह विद्यार्थी को किसी भटकाव का शिकार न होने दे। आज कुछ स्थानों पर पठन-पाठन का वातावरण पहले जैसा नहीं दिखाई देता।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम लोगों के विद्यार्थी रहते परिवार के सदस्य प्रेरित करते थे कि एक-दो समाचार पत्र नियमित पढ़ो, पाठ्यक्रम की पुस्तकों के साथ-साथ रेफरेंस बुक्स भी देखो। यह भी सिखाया जाता था कि किसी पुस्तक या लेख में व्याकरणीय अशुद्धि के कारण अर्थ का अनर्थ हो सकता है, तो केवल उसी पर विश्वास न करें। लेकिन, आज स्थिति बदल गई है। पुस्तकालयों में शिक्षकों व विद्यार्थियों की उपस्थिति घटी है। पहले शिक्षक गांव-गांव और घर-घर जाकर आंकड़े एकत्र करते थे। तब शायद यह अच्छा नहीं लगता था, लेकिन आज समझ में आता है कि जनगणना के आंकड़े जुटाने के साथ-साथ शिक्षक को उस गांव, मोहल्ले और समाज की सामाजिक तथा आर्थिक पृष्ठभूमि को समझने का भी अवसर मिलता था।

विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाने का मंत्र

सीएम ने शिक्षकों से कहा, जब आप नए सत्र की पहली कक्षा लें, तो सीधे पाठ्यक्रम शुरू करने से पहले उसे परिचयात्मक व रोचक बनाइए। तब छात्र आपकी कक्षा में आने के लिए उत्सुक होंगे। यदि बीच-बीच में प्रेरक प्रसंग, उद्धरण और जीवन से जुड़े उदाहरण शामिल किए जाएं, तो वही पाठ्यक्रम विद्यार्थियों के लिए अधिक आकर्षक, सहज और रुचिकर बन सकता है। भारत ने जब-जब शिक्षकों के प्रति सम्मान का भाव जागृत किया है, तब-तब नए प्रतिमान स्थापित किए हैं।

वरिष्ठ नागरिक समाचार पत्रों से लेते हैं जानकारी

सीएम ने कहा कि मीडिया का स्वरूप तेजी से बदला है। समाज का एक वर्ग आज भी अखबार पढ़ता है। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिक व सेवानिवृत्त लोग समाचार पत्रों के माध्यम से देश-दुनिया की जानकारी प्राप्त करते हैं। दूसरा वर्ग ऐसा है, जिसे सीमित समय मिलता है। वह न्यूज चैनलों के माध्यम से प्रमुख घटनाओं की जानकारी ले लेता है। लेकिन युवाओं का एक बड़ा वर्ग, लगभग 60 प्रतिशत, अपने स्मार्टफोन व यूट्यूब के माध्यम से देश-दुनिया को समझने का प्रयास करता है। स्मार्टफोन पर जो सामग्री समाचार या विचार के रूप में उपलब्ध है, छात्र कई बार उसी को सच मान लेता है। जबकि यह आवश्यक नहीं कि वह सच ही हो।

प्रिंट बनाम सोशल मीडिया की भूमिका

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले सभी लोग मीडिया को सत्य के सबसे निकट मानते थे। समाचार पत्रों पर लोगों का विश्वास था। जनचेतना जगाने और स्वाधीनता संग्राम को आगे बढ़ाने में प्रिंट मीडिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उसकी एक जवाबदेही भी थी। यदि कोई गलत समाचार प्रकाशित भी होता था, तो रिपोर्टर, संपादक व संस्थान, सभी की पहचान स्पष्ट होती थी। लेकिन, सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट व गुमनाम प्लेटफॉर्म के माध्यम से कोई भी व्यक्ति समाज में भ्रम व विद्वेष फैलाने का प्रयास कर सकता है। सही तथ्यों की जानकारी और आत्म-अनुशासन के अभाव में पूरा समाज अव्यवस्था व अराजकता का शिकार हो सकता है, जिसका दुष्परिणाम वर्तमान और भविष्य दोनों को भुगतना पड़ता है।

आत्म-अनुशासन का महत्व समझाना होगा

सीएम ने कहा कि वर्तमान व भविष्य, दोनों को सही दिशा देनी है, तो हमें छात्रों को अनुशासन के साथ-साथ आत्म-अनुशासन का महत्व भी समझाना होगा। सोशल मीडिया व एआई नए दौर की आवश्यकता हैं। बदलती दुनिया में न तो हम इसमें पीछे रह सकते हैं और न ही इनसे मुंह मोड़ सकते हैं। आवश्यकता इस बात की है कि इन्हें अपने, समाज व देश के कल्याण के लिए कैसे उपयोगी बनाया जाए। शिक्षक अच्छे कंटेंट तैयार करें, प्रेरक उद्धरणों और सकारात्मक विचारों के माध्यम से छात्रों को प्रेरित करें और उन्हें समझाएं कि सच क्या है और झूठ क्या है। गुमनाम प्लेटफॉर्म, फर्जी अकाउंट और भ्रामक सूचनाओं से सावधान रहने के लिए जागरूक करें। आज हर व्यक्ति किसी भी जानकारी के लिए सबसे पहले गूगल का सहारा लेता है, जबकि वहां उपलब्ध हर जानकारी प्रामाणिक हो, यह आवश्यक नहीं।

तकनीक का इस्तेमाल देश व समाज के हित में करें

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने टाटा टेक्नोलॉजीस के सहयोग से इंजीनियरिंग कॉलेजों, पॉलिटेक्निक व आईटीआई में एआई, ड्रोन टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स व 3डी प्रिंटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों की सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं, जिनका लाभ शिक्षण संस्थानों को भी उठाना चाहिए। विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्रों व शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रशिक्षण दिया जाए। शिक्षक थोड़ा भी प्रयास करें, तो इन तकनीकों का उपयोग पाठ्यक्रम, समाज व देश के हित में प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। ऐसा नहीं हुआ, तो भारत विरोधी शक्तियां इन्हीं तकनीक व सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर समाज में भ्रम, विद्वेष और अव्यवस्था फैलाने का प्रयास करेंगी।

षड्यंत्र के खिलाफ खड़े हों शिक्षण संस्थान

सीएम ने कहा कि भारत के खिलाफ कोई विदेशी या घरेलू षड्यंत्र हो, जो फिर से देश को विघटन की ओर ले जा रहा हो, अव्यवस्था पैदा करने का प्रयास कर रहा हो, ऐसी किसी भी षड्यंत्र के खिलाफ हमारे शिक्षण संस्थानों को खड़ा होना पड़ेगा। युवा पीढ़ी को जागरूक करना पड़ेगा।

इस अवसर पर केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, प्रदेश के मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय, भूपेंद्र चौधरी, सांसद राजकुमार चाहर, कुलपति आशु रानी, महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाहा, विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मंजू भदौरिया, डॉ. जीएस धर्मेश, पुरुषोतम खण्डेलवाल, चौधरी बाबूलाल, भगवान सिंह कुशवाहा, छोटे लाल वर्मा, रानी पक्षालिका सिंह, कुलसचिव अजय मिश्रा एवं अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

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