चीन की आबादी में लगातार चौथे वर्ष कमी आई; एक संतान नीति को जिम्मेदार ठहराया जा रहा

चीन की आबादी में लगातार चौथे वर्ष कमी आई; एक संतान नीति को जिम्मेदार ठहराया जा रहा

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  • Publish Date - January 19, 2026 / 06:53 PM IST,
    Updated On - January 19, 2026 / 06:53 PM IST

(के जे एम वर्मा)

बैंकॉक, 19 जनवरी (भाषा) चीन की जनसंख्या लगातार चौथे वर्ष घटी है क्योंकि 2025 में जन्म दर एक दशक पहले की तुलना में लगभग एक करोड़ कम हो गई। इस प्रवृत्ति के लिए व्यापक रूप से एक-संतान नीति के दीर्घकालिक प्रभावों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (एनबीएस) द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, 2025 में केवल 79.2 लाख बच्चों का जन्म हुआ, जबकि 2024 में यह संख्या 95.4 लाख थी यानी 2025 में 17 प्रतिशत की गिरावट आई।

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह 1949 में आबादी का रिकॉर्ड रखना शुरू होने के बाद से सबसे कम जन्म दर है और 2023 में दर्ज न्यूनतम जन्म दर के पिछले रिकॉर्ड से भी निचले स्तर पर है। 2023 में ही चीन को पीछे छोड़ते हुए भारत सर्वाधिक आबादी वाला देश बन गया था।

चीन की मौजूदा प्रजनन दर के आधार पर, संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग (डीईएसए) ने 2024 में अनुमान लगाया था कि वर्ष 2100 तक चीन की जनसंख्या में 63.3 करोड़ की कमी आएगी।

सोमवार को जारी एनबीएस के आंकड़ों के अनुसार, चीन की कुल जनसंख्या 2025 में 33.9 लाख घटकर 1.4049 अरब हो गई, जो एक वर्ष पहले 1.4083 अरब थी।

इसके अलावा, चीन वर्तमान में बुजुर्गों की तेजी से बढ़ती आबादी की समस्या से जूझ रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2024 के अंत तक चीन में 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की संख्या 31 करोड़ तक पहुंच गई थी।

2035 तक, इस आयु वर्ग के लोगों की संख्या 40 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है।

हांगकांग से प्रकाशित होने वाले ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ की खबर के अनुसार, पिछले वर्ष की जनसंख्या में अब तक की सबसे तेज वार्षिक गिरावट दर्ज की गई, जो 1959 से 1961 तक चीन में पड़े भीषण अकाल के दौरान हुई गिरावट को छोड़कर सबसे अधिक है।

इस बीच, पिछले वर्ष लगभग 1.13 करोड़ लोगों की मृत्यु हुई जो पिछले पांच दशकों में सबसे अधिक है।

चीन के गंभीर जनसांख्यिकीय संकट का कारण सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा दशकों से अपनाई गई एक-संतान नीति को माना जा रहा है।

जनसांख्यिकीय संकट के अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका के बीच, चीन ने 2016 में एक-संतान नीति को समाप्त कर दिया और सभी दंपतियों को दो बच्चे पैदा करने की अनुमति दी थी।

चूंकि इसका कोई खास असर नहीं हुआ, इसलिए चीन ने 2021 में जनसंख्या नीति में संशोधन किया, जिसके तहत लोगों को तीन बच्चे पैदा करने की अनुमति दी गई, ताकि लालन-पालन के बढ़ते खर्च के कारण दंपतियों की अधिक बच्चे पैदा करने की अनिच्छा को दूर किया जा सके।

पिछले कुछ वर्षों में चीन ने जन्म दर बढ़ाने के लिए कई नीतियां लागू की हैं, जिनमें राष्ट्रीय शिशु देखभाल सब्सिडी योजना शामिल है। इस योजना के तहत प्रत्येक बच्चे के लिए प्रति वर्ष 1,534 अमेरिकी डॉलर तक की सहायता राशि दी जाती है।

बीजिंग ने दंपतियों को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करने के वास्ते कंडोम पर कर भी बढ़ा दिया है।

‘इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट’ में चीन की प्रमुख अर्थशास्त्री सु यू के अनुसार, चीन में जनसंख्या में गिरावट की गति आश्चर्यजनक है।

उन्होंने अखबार को बताया कि युवाओं में शादी करने की अनिच्छा और बढ़ते खर्च जन्म दर को हतोत्साहित करने वाले प्रमुख कारण हैं।

चीन जनसंख्या संघ के उपाध्यक्ष युआन शिन ने पिछले वर्ष जन्म दर में गिरावट और 2024 में विवाहों में आई भारी कमी के बीच संबंध की ओर इशारा किया।

युआन ने कहा कि चीन में 2024 में 61.06 लाख विवाह का पंजीकरण हुआ, जो इसके पिछले वर्ष की तुलना में 20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट है और 1980 के बाद से सबसे कम है।

हालांकि, अखबार की खबर के अनुसार, 2025 की पहली तीन तिमाहियों में चीन में विवाह पंजीकरण में पिछले वर्ष की तुलना में 8.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे विश्लेषकों का मानना ​​है कि विवाह-समर्थक नीतियों का असर दिखना शुरू हो गया है।

भाषा सुभाष खारी

खारी