वैश्विक चुनौतियों से निपटने में राष्ट्रमंडल की अहम भूमिका हो सकती है: कीर्ति वर्धन सिंह

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वैश्विक चुनौतियों से निपटने में राष्ट्रमंडल की अहम भूमिका हो सकती है: कीर्ति वर्धन सिंह

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  • Publish Date - March 10, 2026 / 08:31 AM IST,
    Updated On - March 10, 2026 / 08:31 AM IST

(अदिति खन्ना)

लंदन, 10 मार्च (भाषा) विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि दुनिया में जारी संघर्षों से जो वैश्विक चुनौतियां सामने आ रही हैं, उन्हें लोकतांत्रिक देशों के सबसे बड़े समूह राष्ट्रमंडल के माध्यम से दूर किया जा सकता है और इसके लिए सभी देशों को अपने संसाधनों को मिलाकर साथ-साथ आगे बढ़ना होगा।

राष्ट्रमंडल के विदेश मंत्रियों की बैठक (सीएफएएमएम) के 26वें संस्करण में भाग लेने के लिए ब्रिटेन पहुंचे सिंह ने सोमवार को लंदन के सेंट जेम्स पैलेस में आयोजित विशेष स्वागत समारोह में शिरकत की।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का भी जिम्मा संभाल रहे मंत्री ने ‘कॉमनवेल्थ डे’ के वार्षिक स्वागत समारोह के मेजबान महाराजा चार्ल्स तृतीय से मुलाकात के दौरान जलवायु कार्रवाई से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “महाराजा को पर्यावरण संरक्षण में बहुत गहरी रुचि है। उन्होंने कहा कि हमें यह काम करना ही होगा ताकि आने वाली पीढ़ियों को परेशानी न झेलनी पड़े।”

इस साल ‘कॉमनवेल्थ डे’ का विषय था, “समृद्ध राष्ट्रमंडल के लिए साथ मिलकर अवसरों को खोलना”। सप्ताहांत में कई कार्यक्रम हुए, जिनमें सिंह ने व्यापक चर्चाओं में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।

सिंह ने कहा, “(सीएफएएमएम) बैठक में सभी देशों का एक ही मुख्य विचार यह था कि हमें आज के समय में राष्ट्रमंडल को और अधिक प्रासंगिक बनाना होगा। चर्चा का एक बड़ा मुद्दा यह था कि देश अपने तुलनात्मक और प्रतिस्पर्धी लाभों का इस्तेमाल कैसे करें, ताकि सभी देशों के लिए सकारात्मक और सतत विकास सुनिश्चित हो सके।”

यह पूछे जाने पर कि क्या पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर चर्चा के दौरान प्रमुखता से विचार किया गया, मंत्री ने कहा, “दुनिया की व्यवस्था में हो रहे मौजूदा बदलाव और बाधाएं हमारी बैठक की चर्चा का अहम हिस्सा रहीं।”

उन्होंने कहा, “हम लोकतांत्रिक देशों का सबसे बड़ा समूह हैं—कुछ देश विकसित हैं और कुछ विकासशील। हमें आगे बढ़ने के लिए अपने मानव संसाधन और प्राकृतिक संसाधनों को साथ मिलाकर काम करना होगा। हम आज आपूर्ति शृंखला में बाधा और ऊर्जा सुरक्षा जैसी जिन अनिश्चितताओं का सामना कर रहे हैं, उन्हें मिलकर सुलझा सकते हैं।”

सिंह ने कहा कि मजबूत सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल सार्वजनिक ढांचे के कारण भारत संगठन के अन्य विकासशील देशों के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन बन सकता है।

उन्होंने कहा, “(राष्ट्रमंडल की) महासचिव (शर्ली बोचवे) जिस तरह संगठन में सुधारों को आगे बढ़ा रही हैं और इसे अधिक समावेशी, अधिक लोकतांत्रिक और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कदम उठा रही हैं, उससे हम सभी काफी खुश हैं।”

भाषा खारी सुरभि

सुरभि