नयी दिल्ली, दो दिसंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक जनहित याचिका पर केंद्र सरकार से प्रतिक्रिया मांगी है जिसमें दावा किया गया है कि ‘सेंट्रलाइज्ड मॉनिटरिंग सिस्टम’ (सीएमसएस), ‘नेटवर्क ट्रैफिक एनालिसिस’ (नेत्र) और ‘नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड’ (नैटग्रिड) जैसी निगरानी प्रणालियों से नागरिकों के निजता के अधिकार को “खतरा” है।
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की एक पीठ ने एक गैर सरकारी संगठन की याचिका पर गृह, सूचना प्रौद्योगिकी, संचार तथा विधि एवं न्याय मंत्रालयों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा है।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए सात जनवरी 2021 की तारीख तय की है।
केंद्र सरकार के वकील अजय दिगपाल ने सभी मंत्रालयों की ओर से नोटिस ग्रहण की।
‘सेंटर फॉर पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन’ और ‘सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर’ नामक गैर सरकारी संगठनों की ओर से दायर याचिका में दावा किया गया है कि इन निगरानी प्रणालियों से केंद्र और राज्य सरकार की एजेंसियां एक साथ दूरसंचार के सभी माध्यमों पर हो रही बातचीत का पता लगा सकती हैं जो निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।
वकील प्रशांत भूषण के जरिये दायर याचिका में कहा गया है कि वर्तमान में जो कानून उपलब्ध हैं उनमें ऐसे प्रावधान नहीं हैं जिससे निगरानी और कॉल सुनने के सरकारी एजेंसियों के आदेशों की समीक्षा की जा सके।
याचिका में कहा गया है कि केंद्र को निर्देश दिया जाए कि वह सीएमएस, नेत्र और नैटग्रिड जैसी निगरानी प्रणालियों को पूरी तरह से बंद करे।
याचिका के अनुसार सीएमएस ऐसी निगरानी प्रणाली है जिससे टेलीफोन कॉल सुनी जा सकती है तथा व्हाट्सएप्प और ईमेल संदेशों को पढ़ा जा सकता है और उन पर निगरानी रखी जा सकती है।
याचिका में कहा गया कि रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के कृत्रिम बुद्धिमत्ता केंद्र (सीएआईआर) द्वारा विकसित ‘नेत्र’ प्रणाली, इंटरनेट तथा सोशल मीडिया और ब्लॉग इत्यादि पर प्रयोग किये जाने वाले हमला, बम, विस्फोट या हत्या जैसे शब्दों पर नजर रखती है।
याचिका में दावा किया गया कि नेत्र वस्तुतः “एक व्यापक निगरानी प्रणाली है जिसे राष्ट्र के इंटरनेट पर निगरानी रखने के लिए बनाया गया है।
याचिका के अनुसार ‘नैटग्रिड’ एक आतंकवाद रोधी पहल है जिसे सरकारी और निजी क्षेत्र की साझेदारी से स्थापित किया जाना है और इसके तहत ‘बिग डेटा’ तथा उन्नत ‘एनालिटिक्स’ की सहायता से बड़े स्तर पर, विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा।
याचिका में कहा गया कि नैटग्रिड प्रणाली के तहत कर तथा बैंक खातों का विवरण, क्रेडिट कार्ड से लेनदेन, विजा और प्रवास के रिकॉर्ड तथा रेल और हवाई यात्रा पर निगरानी रखी जाएगी।
भूषण ने पीठ के समक्ष कहा कि उच्चतम न्यायालय ने निर्णय दिया है कि नागरिकों के वित्तीय लेनदेन और यात्रा के विवरणों पर बिना किसी कानूनी प्रावधान के निगरानी नहीं रखी जा सकती।
उन्होंने अदालत में कहा कि सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार नागरिकों के संचार पर निगरानी के लिए प्रतिमाह 7,500 से 9,000 अनुमति दी गई और इस अनुमति की समीक्षा के लिए बनाई गई समिति दो महीने में बस एक बार बैठती है।
भाषा यश शाहिद
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