Global Action Terrorism: आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक युद्ध का आह्वान… ISIS और अल-कायदा को अब कोई नहीं बचा पाएगा, संयुक्त राष्ट्र में भारत का बड़ा प्रहार

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Global Action Terrorism: आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक युद्ध का आह्वान... ISIS और अल-कायदा को अब कोई नहीं बचा पाएगा, संयुक्त राष्ट्र में भारत का बड़ा प्रहार

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  • Publish Date - March 5, 2026 / 10:28 AM IST,
    Updated On - March 5, 2026 / 10:34 AM IST

Global Action Terrorism ISIS Al Qaeda/Image Source: ANI

HIGHLIGHTS
  • भारत का ऐलान
  • आतंकवाद दुनिया के लिए बड़ा खतरा
  • कार्रवाई करने की मांग

संयुक्त राष्ट्र: Global Action Terrorism:  भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवादी संगठनों आईएसआईएस और अल कायदा तथा उनके सहयोगियों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करने का आह्वान किया है। भारत ने इस बात पर भी जोर दिया कि आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के ‘‘अस्तित्व’’ के लिए खतरा है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव रघु पुरी ने बुधवार को कहा, ‘‘आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है। यह सीमाओं, राष्ट्रीयता या जातीयता को नहीं जानता और यह एक ऐसी चुनौती है जिसका सामना अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सामूहिक रूप से मिलकर करना होगा।’’

भारत ने यूएन में दी चेतावनी (India terrorism Action )

Global Action Terrorism:  संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद-विरोधी कार्यालय (यूएनओसीटी) द्वारा सदस्य देशों को दिए जाने वाले वार्षिक राजदूत स्तरीय संबोधन में पुरी ने अप्रैल 2025 में जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र किया। इस हमले को पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा (संयुक्त राष्ट्र द्वारा सूचीबद्ध आतंकवादी संगठन) के सहयोगी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने अंजाम दिया था। इस आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की जान चली गई थी। उन्होंने कहा, ‘‘हमें आईएसआईएस और अल कायदा तथा उनके सहयोगियों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करनी होगी।’’ भारत ने बहुपक्षीय सहयोग के लिए एक केंद्रीय साधन के रूप में वैश्विक आतंकवाद विरोधी रणनीति (जीसीटीएस) के महत्व पर जोर दिया।

सभी देशों से मिलकर कार्रवाई की अपील (Terrorism UN speech)

Global Action Terrorism:  पुरी ने कहा कि भारत जीसीटीएस की 9वीं समीक्षा के लिए परामर्श में सक्रियता से हिस्सा लेगा तथा उन्होंने इस प्रक्रिया में वार्ता के दौरान सह-सहायकों फिनलैंड और मोरक्को को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। पुरी ने कहा, ‘‘न्यूयॉर्क और दुनिया भर में (आतंकवादी घटनाओं के बाद) भारत की सभी पहल हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं,’’ जिसमें ‘दिल्ली घोषणा’ भी शामिल है। आतंक फैलाने के उद्देश्य से संचालित गतिविधियों में नयी और उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग का मुकाबला करने के मुद्दे पर ‘दिल्ली घोषणा’ एक ऐतिहासिक दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि आतंकवादी उद्देश्यों में नयी एवं उभरती प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल का मुद्दा कई सदस्य देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

अक्टूबर 2022 में भारत की अध्यक्षता में गठित सुरक्षा परिषद की आतंकवाद-विरोधी समिति (सीटीसी) ने ‘आतंकवादी उद्देश्यों के लिए नयी और उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग का मुकाबला’ विषय पर नयी दिल्ली और मुंबई में एक विशेष बैठक का आयोजन किया था। विशेष बैठक के बाद समिति ने आतंकवादी उद्देश्यों में इस्तेमाल होने वाली नयी और उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग का मुकाबला करने के लिए ‘दिल्ली घोषणा’ को अपनाया था। उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद के लगातार विकसित हो रहे खतरे से निपटने के लिए अपने साझेदारों की क्षमता निर्माण और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करने के वास्ते संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से उसके साथ मिलकर काम करना जारी रखे हुए है।

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आतंकवाद के खिलाफ भारत की संयुक्त राष्ट्र में क्या पहल रही है?

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में आईएसआईएस, अल कायदा और उनके सहयोगियों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करने का आह्वान किया है और वैश्विक आतंकवाद विरोधी रणनीति (GCTS) के माध्यम से सहयोग को बढ़ावा दिया है।

'दिल्ली घोषणा' का आतंकवाद विरोध में क्या महत्व है?

दिल्ली घोषणा आतंकवाद फैलाने के उद्देश्य से नई और उभरती प्रौद्योगिकियों के दुरुपयोग को रोकने के लिए ऐतिहासिक दस्तावेज है, जिसे भारत की अध्यक्षता में CTC ने अपनाया है।

भारत आतंकवाद से निपटने में अन्य देशों के साथ कैसे सहयोग कर रहा है?

भारत फिनलैंड, मोरक्को और अन्य सदस्य देशों के साथ मिलकर प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और सुरक्षा उपायों के माध्यम से आतंकवाद से मुकाबले के लिए साझेदारी कर रहा है।