(फाइल फोटो के साथ)
(फाकिर हसन)
जोहानिसबर्ग, 20 सितंबर (भाषा) राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने विभिन्न क्षेत्रों में भारत की तकनीकी प्रगति का उल्लेख करते हुए दक्षिण अफ्रीका में रहने वाले भारतीय समुदाय से देश के साथ अपने जुड़ाव को और मजबूत करने का आग्रह किया।
हरिवंश ने शुक्रवार को केपटाउन में आयोजित 69वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के बाद जोहानिसबर्ग में आयोजित एक सामुदायिक स्वागत समारोह में ये बातें कहीं।
उन्होंने भारतीय समुदाय के पेशेवरों, नवोन्मेषकों और कारोबारी नेताओं से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में अवसर तलाशने का आग्रह किया।
हरिवंश ने कहा, ‘‘अब आपके पास अगला अध्याय लिखने का अवसर है। इसमें आपके कारोबार, आपके विचार, आपके निवेश और आपके व्यापक नेटवर्क भारत, दक्षिण अफ्रीका और अफ्रीका के बीच एक और मजबूत सेतु बन सकते हैं।’’
दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों पर जोर देते हुए हरिवंश ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका, अफ्रीका में भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है, जहां 150 से ज़्यादा बड़ी भारतीय कंपनियां काम कर रही हैं और 20,000 से अधिक लोगों को रोजगार दे रही हैं।
हरिवंश ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने की काफी संभावनाएं हैं।
उन्होंने अफ्रीका के लिए भारत के समर्थन को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत की अध्यक्षता के दौरान 2023 में अफ्रीकी संघ को जी20 के स्थायी सदस्य के रूप में शामिल किया गया।
उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में रहने वाले भारतीय मूल के लगभग 17 लाख लोगों की तारीफ की, जिन्होंने अपनी भारतीय विरासत से जुड़े रहते हुए भी व्यापार, शिक्षा, चिकित्सा, कानून, जन-सेवा और संस्कृति के क्षेत्रों में योगदान दिया है।
हरिवंश ने दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गांधी के उन वर्षों को भी याद किया जब वहां नस्लीय भेदभाव के अनुभवों ने भारत लौटने से पहले उनके राजनीतिक विचारों को आकार देने में मदद की थी।
हरिवंश ने कहा, ‘‘अतीत की मित्रता को भविष्य की साझेदारी में बदलें।’’ उन्होंने प्रवासी भारतीय समुदाय से भारत में निवेश करने, युवा नवोन्मेषकों का मार्गदर्शन करने और दोनों देशों के बीच कारोबारी संबंधों को मजबूत करने का आग्रह किया।
भाषा आशीष नरेश
नरेश