ब्रिटेन में प्रस्तावित मुस्लिम-विरोधी परिभाषा पर हिंदू-सिख संगठनों की चेतावनी

ब्रिटेन में प्रस्तावित मुस्लिम-विरोधी परिभाषा पर हिंदू-सिख संगठनों की चेतावनी

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  • Publish Date - January 2, 2026 / 11:05 PM IST,
    Updated On - January 2, 2026 / 11:05 PM IST

(अदिति खन्ना)

लंदन, दो जनवरी (भाषा) ब्रिटेन के हिंदू और सिख संगठनों ने चेतावनी दी है कि ब्रिटिश सरकार द्वारा विचाराधीन ‘‘मुस्लिम-विरोधी शत्रुता’’ की प्रस्तावित मसौदा परिभाषा को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि यह मसौदा हाल ही में मीडिया के कुछ हिस्सों में लीक हो गया है।

‘हिंदू काउंसिल, ब्रिटेन’ ने इस सप्ताह समुदाय मामलों के मंत्री स्टीव रीड को पत्र लिखकर कहा है कि मसौदा न केवल ‘गंभीर रूप से त्रुटिपूर्ण’ है, बल्कि यदि इसे औपचारिक रूप से अपनाया जाता है तो इसके गंभीर अनपेक्षित परिणाम होने का खतरा है।

बीबीसी ने पिछले महीने रिपोर्ट किया था कि सरकार द्वारा पिछले साल फरवरी में गठित मुस्लिम विरोधी घृणा/इस्लामोफोबिया पर कार्य समूह ने एक मसौदा प्रस्तुत किया था, जिसमें से ‘इस्लामोफोबिया’ शब्द को हटा दिया गया था।

हिंदू काउंसिल ने आवास, समुदाय और स्थानीय निकाय मामलों के मंत्रालय (एमएचसीएलजी) में राज्य मंत्री को लिखे पत्र में कहा है, ‘हिंदू, सिख, ईसाई, धर्मनिरपेक्ष और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संगठनों द्वारा साझा की गई एक प्रमुख चिंता यह है कि संबंधित परिभाषा मुसलमानों के प्रति शत्रुता और इस्लाम की एक विश्वास प्रणाली के रूप में आलोचना के बीच स्पष्ट रूप से अंतर करने में विफल रहती है।’’

पत्र में कहा गया है, ‘हिंदू परिषद और कई संगठनों ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि इस तरह की परिभाषाओं को अदालतों के माध्यम से नहीं, बल्कि विश्वविद्यालयों, स्थानीय परिषदों, एनएचएस, नियोक्ताओं और नियामकों में संस्थागत नीतियों के माध्यम से लागू किया जाता है, जहां प्रतिबंध की सीमा अक्सर कानून द्वारा आवश्यक सीमा से कहीं कम होती है।’

इसमें कहा गया है, ‘‘हिंदुओं और अन्य धार्मिक परंपराओं जैसे अल्पसंख्यक समुदायों के लिए, यह एक गंभीर खतरा पैदा करता है।’’

मसौदा प्रस्ताव के अनुसार, कार्य समूह ‘‘मुस्लिम विरोधी शत्रुता’’ को ‘आपराधिक कृत्यों में संलग्न होने या उन्हें प्रोत्साहित करने’ के रूप में परिभाषित करना चाहता है, जिसमें हिंसा, संपत्ति की तोड़फोड़ और उत्पीड़न और धमकी शामिल है, चाहे वह शारीरिक, मौखिक, लिखित या इलेक्ट्रॉनिक रूप से संप्रेषित हो, जो मुसलमानों या उन लोगों को लक्षित करता है, जिन्हें उनके धर्म, जातीयता या उपस्थिति के कारण मुसलमान माना जाता है।

नेटवर्क ऑफ सिख ऑर्गेनाइजेशन्स (एनएसओ) के हरदीप सिंह ने भी परिभाषा की ‘अत्यंत अस्पष्ट’ प्रकृति के प्रति आगाह किया।

सरकार के कार्य समूह की सदस्य बैरोनेस शाइस्ता गोहिर ने बीबीसी से कहा कि उनका प्रस्तुतीकरण ‘उचित संतुलन’ स्थापित करता है, क्योंकि यह ‘व्यक्तियों की सुरक्षा करते हुए अति-विस्तार से भी बचाता है।’

हाल ही में लीक हुए मसौदे पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए, मंत्रालय ने केवल इतना कहा कि वह ‘नफरत और चरमपंथ से हर जगह निपट रहा है।’

मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हमेशा बचाव करेंगे, और सिफारिशों पर सावधानीपूर्वक विचार करते समय यह हमारे लिए सर्वोपरि है।’

भाषा तान्या सुरेश

सुरेश