प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान भारत और यूएई ने ऊर्जा, रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर किए

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प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान भारत और यूएई ने ऊर्जा, रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर किए

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  • Publish Date - May 15, 2026 / 08:58 PM IST,
    Updated On - May 15, 2026 / 08:58 PM IST

अबू धाबी, 15 मई (भाषा) भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने शुक्रवार को पेट्रोलियम भंडार, दीर्घकालिक एलपीजी आपूर्ति, रक्षा और जहाजरानी से संबंधित कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिसमें अबू धाबी ने भारत में कुल पांच अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश का वादा किया।

पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ उच्च स्तरीय वार्ता की।

एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, इन छह समझौतों में रणनीतिक रक्षा साझेदारी से संबंधित रूपरेखा भी शामिल है, जो रक्षा औद्योगिक सहयोग, प्रौद्योगिकी साझाकरण, नवाचार और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग पर केंद्रित है। इसके तहत, दोनों देश कई अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के अलावा सैन्य उपकरणों के संयुक्त विकास की संभावनाओं का पता लगाने पर सहमत हुए हैं।

बयान के अनुसार, इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (देश के सामरिक पेट्रोलियम भंडार के रखरखाव के लिए जिम्मेदार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी) ने अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के साथ ‘रणनीतिक सहयोग’ के उद्देश्य से एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

बयान के अनुसार, इससे भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में संयुक्त अरब अमीरात की हिस्सेदारी बढ़कर तीन करोड़ बैरल हो जाएगी और भारत में रणनीतिक गैस भंडार स्थापित होंगे।

इंडियन ऑयल लिमिटेड कंपनी और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के बीच एक अलग समझौते के तहत एलपीजी की बिक्री और खरीद में नए अवसर मिलेंगे, जिसमें ईंधन की दीर्घकालिक आपूर्ति और दोनों कंपनियों के बीच दीर्घकालिक बिक्री-खरीद समझौते में प्रवेश करना शामिल है।

दोनों पक्षों ने एलपीजी में ‘रणनीतिक सहयोग’ समझौते पर भी हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य भारत में सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली खाना पकाने की गैस की दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों पक्षों के बीच हुए समझौतों को ऊर्जा, रक्षा, बुनियादी ढांचा, जहाजरानी और उन्नत प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में ‘‘अहम’’ बताया।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि पांच अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता में अबू धाबी निवेश प्राधिकरण और भारत के राष्ट्रीय अवसंरचना एवं निवेश कोष की भारत के अवसंरचना क्षेत्र में एक अरब अमेरिकी डॉलर तक के निवेश की संभावनाओं का पता लगाने की योजना शामिल है।

मंत्रालय के अनुसार, ‘एमिरेट्स एनबीडी’ आरबीएल बैंक में तीन अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करेगी, जबकि यूएई स्थित इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी भारत की सम्मान कैपिटल में एक अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करेगी।

भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा, ‘‘निवेश के क्षेत्र में, संयुक्त अरब अमीरात पारंपरिक रूप से भारत में एक महत्वपूर्ण निवेशक रहा है। पिछले 25 वर्षों में यह भारत में कुल मिलाकर सातवां सबसे बड़ा निवेशक है।’’

प्रधानमंत्री और अल नाहयान की मुलाकात मोदी के पांच देशों के दौरे के पहले चरण में यूएई पहुंचने के तत्काल बाद हुई।

आधिकारिक बयान के अनुसार, ‘‘दोनों पक्ष रक्षा औद्योगिक सहयोग को गहरा करने और नवाचार एवं उन्नत प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण, अभ्यास, समुद्री सुरक्षा, साइबर रक्षा, सुरक्षित संचार और सूचना आदान-प्रदान पर सहयोग करने पर सहमत हुए हैं।’’

मंत्रालय ने कहा कि अन्य समझौता गुजरात के वडीनार में एक जहाज मरम्मत केंद्र स्थापित करने और बंदरगाहों और तटीय बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने से संबंधित है, जबकि पांचवां समझौता जहाज मरम्मत में कौशल विकास की व्यवस्था से संबंधित है।

इसने कहा कि एक और समझौता हुआ है, जो भारत की कृत्रिम बुद्धिमत्ता संबंधी महत्वाकांक्षाओं को बढ़ावा देने के लिए सुपरकंप्यूटर का एक समूह स्थापित करने से संबंधित है।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि मोदी-अल नाहयान ने दोनों देशों के सीमा शुल्क और बंदरगाह प्राधिकरणों को जोड़ने वाले ‘वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर’ के संचालन का भी स्वागत किया, जिसका उद्देश्य माल की आवाजाही को सुव्यवस्थित करना, लागत को कम करना और पारगमन समय को घटाना है।

भाषा शफीक माधव

माधव