INDIA OIL/ image source: IBC24
India US Russia Oil Deal: नई दिल्ली: अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने की 30 दिन की अस्थायी छूट दी है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति बनी रहे और भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सके। अमेरिकी वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कदम अल्पकालिक है और रूसी सरकार को कोई विशेष लाभ नहीं मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से भारत-अमेरिका के रणनीतिक और आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे, जबकि नई दिल्ली को अमेरिकी तेल खरीद बढ़ाने का भी अवसर मिलेगा।
अमेरिकी वित्त विभाग ने भारतीय रिफाइनरियों को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिनों तक की अस्थायी छूट देने का निर्णय लिया है। यह कदम वैश्विक तेल बाजार में आपूर्ति को बनाए रखने और ऊर्जा संकट को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है। अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह अल्पकालिक और अस्थायी छूट है, जिससे रूसी सरकार को कोई विशेष वित्तीय लाभ नहीं मिलेगा। इस निर्णय से भारत को अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अपनी स्थिति बनाए रखने में मदद मिलने की संभावना है। गौर करने वाली बात है कि अमेरिका की तरफ से ही भारत पर रूसी तेल की खरीद बंद करने का दबाव बनाया गया था। यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है, जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बड़ी संख्या में तेल के जहाज फंसे होने की खबरें सामने आ रहीं हैं।
President Trump’s energy agenda has resulted in oil and gas production reaching the highest levels ever recorded.
To enable oil to keep flowing into the global market, the Treasury Department is issuing a temporary 30-day waiver to allow Indian refiners to purchase Russian oil.…
— Treasury Secretary Scott Bessent (@SecScottBessent) March 6, 2026
अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक साझेदार है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई दिल्ली इस अवसर का लाभ उठाकर अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगी, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे। विश्लेषकों के अनुसार, यह छूट न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करेगी, बल्कि रूस से तेल आयात को भी अल्पकालिक तौर पर आसान बनाएगी। इस बीच, वैश्विक तेल बाजार में कीमतों और आपूर्ति पर भी इस निर्णय के सकारात्मक प्रभाव की संभावना जताई जा रही है।
इस कदम को अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा स्थिरता और बाजार संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी बताया है। अमेरिकी वित्त विभाग ने स्पष्ट किया कि यह नीति सिर्फ 30 दिनों तक लागू रहेगी और इसके बाद स्थिति का पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस छूट का लाभ उठाकर अपनी रिफाइनरी उत्पादन क्षमता बढ़ा सकता है और वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला में अपनी भूमिका मजबूत कर सकता है।