Israel-Iran War | Photo Credit: IBC24
नई दिल्ली: Israel-Iran War दुनिया की धड़कनें रुकी हुई हैं। नक्शे पर खिंची लकीरें अब खून से रंगी जा रही हैं। 28 फरवरी को अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद जो चिंगारी सुलगी थी, आज तीसरे दिन वो विश्व युद्ध की दहलीज पर खड़ी है। ईरान ने न केवल इजराइल, बल्कि पूरी दुनिया की ‘एनर्जी सप्लाई’ पर सीधा प्रहार कर दिया है। सऊदी अरब के रास तनूरा से उठता धुआं केवल एक रिफाइनरी का जलना नहीं है, बल्कि ग्लोबल इकोनॉमी की तबाही का संकेत है।
Israel-Iran War ये हमला मामूली नहीं है। सऊदी अरामको की रास तनूरा रिफाइनरी, जो दुनिया के सबसे बड़े ऑफशोर ऑयल लोडिंग टर्मिनल्स में से एक है, अब खंडहर में तब्दील हो चुकी है। ईरान ने यहां की 6 लाख बैरल प्रतिदिन की क्षमता को ठप कर दिया है। अमेरिका से लेकर यूरोप और एशिया के बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में आग लगनी तय है। ये हमला ग्लोबल सप्लाई चेन को तोड़ने की ईरान की सोची-समझी रणनीति है।
जंग अब त्रिकोणीय नहीं रही ईरान ने अपना दायरा बढ़ा दिया है। कतर, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के सैन्य ठिकानों और शहरों पर आज फिर मिसाइलें गिरी हैं। खाड़ी के वो देश जो अब तक शांति की उम्मीद कर रहे थे, आज ईरान के निशाने पर है। उधर, अमेरिका को भी बड़ा झटका लगा है। कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि आज सुबह कई अमेरिकी लड़ाकू विमान तकनीकी खामी या हमलों की वजह से क्रैश हुए हैं। हालांकि क्रू को बचा लिया गया है, लेकिन अमेरिकी वायुसेना के लिए यह एक काला दिन साबित हुआ है।
जब ईरान जल रहा है, तो लेबनान कैसे शांत रहता? ईरान समर्थित आतंकी संगठन हिजबुल्लाह ने आधिकारिक तौर पर युद्ध का ऐलान कर दिया है। इजराइल के यरुशलम से लेकर तेल अवीव तक, हिजबुल्लाह के रॉकेटों ने भारी तबाही मचाई है। उनका एक ही नारा है—’खामेनेई की मौत का बदला’ इजराइल अब Two-Front War में फंस गया है। एक तरफ ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें और दूसरी तरफ हिजबुल्लाह की छापामार बमबारी।
लेकिन इस बारूद की सबसे बड़ी कीमत बेकसूर चुका रहे हैं। ईरान के एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 180 छात्राओं की मौत हो गई। 30 घंटों के भीतर अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर 2000 से ज्यादा बम बरसाए हैं। ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी के आंकड़े बताते हैं कि अब तक 555 लोगों की जान जा चुकी है। ईरान का सनंदज शहर हो या दक्षिणी फार्स प्रांत, हर तरफ सिर्फ लाशें और मलबे में दबी गाड़ियां नजर आ रही हैं।
ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी का सोमवार का बयान साफ कर देता है कि अब मेज पर बातचीत की कोई जगह नहीं बची है। ‘नो टॉक विद अमेरिका’—इस रुख ने दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की आहट सुना दी है। क्या UN दखल देगा? या ये आग पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लेगी? फिलहाल, बारूद की गंध और मासूमों की चीखें ही इस जंग की हकीकत हैं।