अफगान तालिबान और उससे संबद्ध आतंकी समूहों के लगभग 352 लड़ाके मारे गए : पाकिस्तान

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अफगान तालिबान और उससे संबद्ध आतंकी समूहों के लगभग 352 लड़ाके मारे गए : पाकिस्तान

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  • Publish Date - February 28, 2026 / 11:21 PM IST,
    Updated On - February 28, 2026 / 11:21 PM IST

इस्लामाबाद, 28 फरवरी (भाषा) पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा कि अफगान तालिबान और उससे संबद्ध आतंकवादी समूहों के लगभग 352 लड़ाके उनके खिलाफ जारी अभियान में मारे जा चुके हैं।

पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने अफगान तालिबान को हुए नुकसान की जानकारी देते हुए बताया कि अभी तक तालिबान के 352 लड़ाके मारे जा चुके हैं और 535 अन्य घायल हुए हैं।

उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन गजब-लिल-हक’ के दौरान पाकिस्तानी सेना ने 130 सैन्य चौकियों को पूरी तरह नष्ट कर दिया, जबकि 26 सीमा चौकियों पर कब्जा कर लिया।

तरार ने कहा कि 171 टैंक और बख्तरबंद वाहन नष्ट हो गए हैं, साथ ही पाकिस्तान ने हवाई हमलों में 41 ठिकानों को निशाना बनाया है।

पाकिस्तान ने यह बड़ा जवाबी हमला तब शुरू किया, जब अफगानिस्तान ने 2,600 किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा पर एक साथ 53 स्थानों पर हमला किया।

सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने शुक्रवार शाम आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अफगान तालिबान को पाकिस्तान और आतंकवादी संगठनों के बीच चुनाव करना होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं एक बात स्पष्ट करना चाहता हूं कि दमनकारी अफगान तालिबान शासन को स्पष्ट निर्णय लेना होगा। उन्हें तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, बलूच लिबरेशन आर्मी, दाएश, अल-कायदा और अन्य आतंकवादी संगठनों तथा पाकिस्तान के बीच किसी एक को चुनना होगा।’’

चौधरी ने कहा, ‘‘उन्हें यह फैसला करना ही होगा। पाकिस्तान सरकार यह पहले ही स्पष्ट कर चुकी है। यह कोई नयी बात नहीं है। उन्हें तय करना होगा कि वे आतंकवाद और आतंकवादी संगठनों को चुनते हैं या पाकिस्तान को। हमारी पसंद बिल्कुल स्पष्ट है। हर स्थिति में पाकिस्तान पहले रहेगा।’’

पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि अफगान तालिबान, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और अन्य आतंकवादी समूहों को प्रशिक्षण देने और हमलों की योजना बनाने के लिए उसकी सरजमीं का इस्तेमाल करने देता है।

अफगान पक्ष इन आरोपों को खारिज करता रहा है और पाकिस्तान से कहता रहा है कि वह अपने देश के अंदर की समस्याओं को सुलझाने के लिए चरमपंथियों से बातचीत करे।

इस बीच, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया।

अमेरिका की राजनीतिक मामलों की उप विदेश मंत्री एलिसन हुकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने शुक्रवार को पाकिस्तान की विदेश मंत्री आमना बलूच से बात की तथा ‘‘पाकिस्तान और तालिबान के बीच हाल में हुए संघर्ष में जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

उन्होंने कहा, ‘‘हम स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और तालिबान के हमलों के खिलाफ आत्मरक्षा करने के पाकिस्तान के अधिकार के प्रति समर्थन व्यक्त करते हैं।’’

तनाव बढ़ने के बीच अफगान तालिबान ने पाकिस्तान के साथ बातचीत की इच्छा भी जताई। अफगान विदेश मंत्रालय के अनुसार, विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने कतर के उप विदेश मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलअजीज अल-खलीफी से फोन पर बातचीत में कहा कि अफगानिस्तान हमेशा आपसी समझ और सम्मान के आधार पर मुद्दों को सुलझाने को प्राथमिकता देता है।

तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने भी यही रुख दोहराते हुए कहा, ‘‘अब हम भी इस मामले को संवाद के माध्यम से सुलझाना चाहते हैं।’’

तनाव कम करने के लिए क्षेत्र के अन्य देशों की ओर से भी कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मध्यस्थता की पेशकश की। उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा कि ईरान दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग बढ़ाने के लिए हरसंभव सहायता देने को तैयार है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सऊदी अरब और कतर भी शांति स्थापित कराने के प्रयासों में लगे हैं।

सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान ने पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक डार तथा अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर मुत्ताकी से बातचीत की है।

तुर्किये भी दोनों पक्षों के संपर्क में है और तनाव समाप्त कराने के प्रयास कर रहा है।

भाषा

देवेंद्र सिम्मी

सिम्मी