नेपाल में ‘जेन जी’ आंदोलन के एक साल होने पर मृतकों को दी गई श्रद्धांजलि

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नेपाल में ‘जेन जी’ आंदोलन के एक साल होने पर मृतकों को दी गई श्रद्धांजलि

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  • Publish Date - September 8, 2026 / 07:00 PM IST,
    Updated On - September 8, 2026 / 07:00 PM IST

(शिरीष बी प्रधान)

काठमांडू, आठ सितंबर (भाषा) नेपाल के मंत्रियों, सांसदों, नागरिक संस्थाओं के कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने पिछले साल हुई हिंसा के पीड़ितों को मंगलवार को काठमांडू स्थित पुराने संसद भवन में श्रद्धांजलि दी। यह कार्यक्रम भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुए ‘जेन जी’ आंदोलन के एक साल होने के मौके पर आयोजित किया गया।

नेपाल में युवाओं के आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली की सरकार गिर गई थी।

सरकार ने मंगलवार को ‘जेन जी शहीद दिवस’ के अवसर पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया। पिछले साल आठ और नौ सितंबर को ‘जेन जी’ आंदोलन के दौरान जान गंवाने वालों की याद में पूरे नेपाल में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए।

डिजिटल माध्यम से शुरू हुआ आंदोलन जल्द ही देशव्यापी आंदोलन में बदल गया था। प्रदर्शनकारियों ने भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, बेरोजगारी, असमानता और जवाबदेही के अभाव जैसे मुद्दे उठाए।

‘जेन जेड’ उस पीढ़ी को कहा जाता है जो 1997 से 2012 के बीच पैदा हुई है।

पिछले साल आठ सितंबर को सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान संसद भवन के पास सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 22 युवाओं की मौत हो गई थी। आंदोलन के दूसरे दिन, नौ सितंबर को प्रदर्शन और तेज हो गए, जिसमें 54 और लोगों की जान चली गई।

मौतों से नाराज ‘जेन जी’ प्रदर्शनकारियों ने पूरे नेपाल में संसद, प्रधानमंत्री कार्यालय और आवास, उच्चतम न्यायालय, प्रशासनिक कार्यालयों और पुलिस चौकियों समेत प्रमुख सरकारी इमारतों में आगजनी और तोड़फोड़ की।

मंगलवार को ‘जेन जी शहीद कल्याण सोसाइटी’ ने पुराने संसद भवन में एक स्मृति समारोह आयोजित किया। इसमें गृह मंत्री सुधन गुरूंग, विज्ञान मंत्री महाबीर पुन, पर्यटन मंत्री खड्ग राज पौडेल, सांसदों, युवाओं, पीड़ितों के परिजनों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, नागरिक संस्थाओं के सदस्यों और अन्य लोगों ने भाग लिया।

गृह मंत्री गुरुंग ने लोगों के साथ मिलकर मोमबत्तियां जलाईं और पिछले साल के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान मारे गए लोगों की याद में कुछ पल का मौन रखा। उन्होंने पीड़ितों की तस्वीरों पर माला भी चढ़ाई।

पिछले साल सितंबर में हुए ‘जेन जी’ आंदोलन के कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री ओली के नेतृत्व वाली सरकार भंग हो गई और पूर्व प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की के नेतृत्व में नयी सरकार का गठन हुआ। इसके बाद अंतरिम सरकार ने पांच मार्च को चुनाव कराया।

चुनाव में करीब दो-तिहाई वोट हासिल करने वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने युवा नेता और पूर्व रैपर बालेन्द्र शाह के नेतृत्व में सरकार का गठन किया।

‘जेन जी’ आंदोलन के एक साल होने के मौके पर कार्की ने कहा, ‘‘आइए हम अपनी जिम्मेदारी और कर्तव्य को ईमानदारी, जिम्मेदारी और सतर्कता के साथ निभाएं, ताकि ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो, जब सुशासन और बदलाव के लिए लोगों को सड़कों पर उतरना पड़े।’’

उन्होंने कहा कि ‘जेन जी’ आंदोलन ने राज्य और राजनीतिक नेतृत्व को स्पष्ट संदेश दिया कि सुशासन के बिना संसद में दो-तिहाई बहुमत भी स्थिरता सुनिश्चित नहीं कर सकता।

‘जेन जी’ कार्यकर्ता तनुजा पौडेल ने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर युवाओं द्वारा शुरू किए गए आंदोलन को एक साल पूरा हो गया है। उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, जेन जी आंदोलन में उठाई गई मांगों में से किसी का भी पूरी तरह समाधान नहीं हुआ है।’’

उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘हालांकि जेन जी आंदोलन के बाद सत्ता का समीकरण बदल गया, लेकिन जेन जी के प्रदर्शनों के दौरान उठाए गए ज्यादातर सवाल अब भी अनुत्तरित हैं।’’

पीड़ित श्रीयम के पिता गणेश चौलागाई ने कहा, ‘‘इस दिन को स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए और हर आने वाली सरकार को यह याद दिलाया जाना चाहिए कि भ्रष्टाचार और सुशासन की अनदेखी को कभी बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।’’

भाषा आशीष माधव

माधव