pakistan on india/ image source: WIKIPEDIA
Pakistan President on India War: दुनिया के कई हिस्सों में इस समय युद्ध और संघर्ष की आंच महसूस की जा रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध को चार साल से अधिक समय बीत चुका है, वहीं पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच सीमा तनाव और ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते टकराव ने वैश्विक शांति को नई चुनौती दी है। इसी पृष्ठभूमि में पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने सोमवार को संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए भारत पर गंभीर आरोप लगाए और दावा किया कि भारत एक और युद्ध की तैयारी में जुटा है।
अपने संबोधन में जरदारी ने कहा कि कुछ भारतीय नेताओं के हालिया बयानों से संकेत मिलता है कि नई सैन्य तैयारी की जा रही है। उन्होंने खुद को क्षेत्रीय शांति का समर्थक बताते हुए कहा कि वे युद्ध के रास्ते की सिफारिश नहीं करेंगे, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी कि यदि पाकिस्तान के खिलाफ किसी प्रकार की आक्रामकता दिखाई गई तो भारत को “एक और अपमानजनक हार” के लिए तैयार रहना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति पहले से ही संवेदनशील बनी हुई है।
जरदारी के बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि पाकिस्तान खुद इस समय अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के साथ सीमा विवाद में उलझा हुआ है। सीमावर्ती इलाकों में लगातार झड़पों और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। ऐसे में भारत के खिलाफ कड़ा रुख अपनाना कई विश्लेषकों को आंतरिक और बाहरी दबावों की रणनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में दिखाई दे रहा है।
अपने भाषण में पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने कहा, “मेरा संदेश भारत के लिए है कि वह युद्ध के माहौल से बाहर आए और सार्थक बातचीत की मेज पर लौटे। यही क्षेत्रीय शांति और स्थिरता का एकमात्र रास्ता है।” उन्होंने यह भी दोहराया कि पाकिस्तान एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति है, जो संवाद को प्राथमिकता देता है, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर अपने बचाव के लिए निर्णायक कदम उठाने में सक्षम है।
जरदारी ने पिछले वर्ष के तथाकथित ‘मार्का-ए-हक’ का उल्लेख करते हुए दावा किया कि पाकिस्तान ने भारत की आक्रामकता को रणनीतिक जीत में बदला था और देश आज भी पूरी तरह तैयार है। हालांकि उन्होंने इस दावे के समर्थन में कोई ठोस विवरण नहीं दिया, लेकिन उनके इस बयान को घरेलू दर्शकों के लिए शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।
अफगानिस्तान के संदर्भ में भी उनका रुख सख्त रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि अफगान नेतृत्व दोहा समझौते का पालन नहीं कर रहा है। राष्ट्रपति ने कहा कि अफगान धरती से Tehreek-e-Taliban Pakistan (टीटीपी), Balochistan Liberation Army (बीएलए) और अन्य आतंकी संगठनों को पनाह मिल रही है। उनके अनुसार, पाकिस्तान की सहनशीलता की सीमा अब समाप्त हो चुकी है और राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
जरदारी का यह भाषण ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में बहुस्तरीय तनाव मौजूद है। एक ओर वैश्विक स्तर पर बड़े संघर्ष जारी हैं, वहीं दक्षिण एशिया में कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण बनता जा रहा है। उनके बयान ने एक बार फिर भारत-पाक संबंधों और पाकिस्तान-अफगान रिश्तों पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान केंद्रित कर दिया है। आने वाले दिनों में इन बयानों का क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।