Saudi Pakistan Friendship: सऊदी को किया था मदद का वादा.. अब खुद फंसा युद्ध के भंवर में, क्या फिर अपने खास दोस्त को पीठ दिखाकर भागेगा पाकिस्तान?

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Saudi Pakistan Friendship: सऊदी को किया था मदद का वादा.. अब खुद फंसा युद्ध के भंवर में, क्या फिर अपने खास दोस्त को पीठ दिखाकर भागेगा पाकिस्तान?

Saudi Pakistan Friendship. Image Source- IBC24 Archive

Modified Date: February 28, 2026 / 04:39 pm IST
Published Date: February 28, 2026 4:39 pm IST
HIGHLIGHTS
  • मिडिल ईस्ट में बहु-देशीय हमलों की खबर से क्षेत्रीय तनाव चरम पर।
  • सऊदी–पाक रक्षा समझौते ने संभावित सैन्य गठबंधन की चर्चा तेज की।
  • पाकिस्तान खुद अफगानिस्तान सीमा पर तनाव से जूझ रहा है, जिससे उसकी भूमिका पर सवाल।

नई दिल्लीः Saudi Pakistan Friendship: ऑपरेशन फतह-ए-खैबर के तहत ईरान ने एकसाथ 7 देशों पर हमला किया है। जिन देशों पर ईरान ने हमला किया है, उनमें इजराइल, यूएई, सऊदी, कुवैत, जॉर्डन, कतर और बहरीन का नाम शामिल है। इससे मिडिल ईस्ट में हड़कंप मच गया है। ऐसे में अब ये कहा जा रहा है कि पाकिस्तान इस जंग में सऊदी अरब का साथ दे सकता है।

दरअसल, पिछले साल सितंबर के महीने में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बीच एक रक्षा समझौता हुआ था। इसके तहत तय हुआ है कि अगर किसी एक देश पर हमला होता है, तो उसे दोनों पर हमला माना जाएगा। दोनों देशों ने एक जॉइंट स्टेटमेंट में कहा था कि यह समझौता दोनों देशों की सुरक्षा बढ़ाने और विश्व में शांति स्थापित करने की प्रतिबद्धता को दिखाता है। इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच डिफेंस कॉर्पोरेशन भी डेवलप किया जाएगा। इस समझौते के तहत मिलिट्री सहयोग किया जाएगा। इसमें जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान के परमाणु हथियारों का इस्तेमाल भी शामिल है।

अमेरिका के साथ भी हुआ था ऐसा समझौता

Saudi Pakistan Friendship: पाकिस्तान ने सऊदी जैसा रक्षा समझौता अमेरिका के भी साथ किया था। 1979 में ये समझौता टूट गया था। उससे पहले भारत पाकिस्तान के बीच 2 जंग हुईं लेकिन एक में भी अमेरिका ने उसकी सीधे मदद नहीं की। 1950 में कोल्ड वॉर के दौरान अमेरिका ने सोवियत संघ के विस्तार को रोकने के लिए दक्षिण एशिया में सहयोगियों की तलाश की। इस समय पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ सैन्य गठबंधन को अपनाया। हालांकि यह बाद में टूट गया था।

पाकिस्तान का अफगानिस्तान के साथ तनाव

बता दें कि इस समय पाकिस्तान खुद अफगानिस्तान के साथ तनावपूर्ण रिश्ते के चलते जूझ रहा है। फगानिस्तान ने पाकिस्तान के बॉर्डर वाले इलाके में बमबारी की तो भड़के पाक ने काबुल तक हवाई हमले कर दिए। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के खिलाफ खुले युद्ध का ऐलान कर दिया है। ऐसे में अब ये बड़ा सवाल है कि युद्ध के जैसे हालात में खुद फंसा पाकिस्तान सउदी अरब का कितना सहयोग कर पाएगा।

जानिए सऊदी अरब की सैन्य शक्ति

Saudi Pakistan Friendship सऊदी अरब अपने ज़्यादातर हथियार अमेरिका, चीन और यूरोपीय देशों से खरीदता है। उसके पास करीब 280 लड़ाकू विमान हैं, जिनमें ज़्यादातर अमेरिका में बने फोर्थ जेनरेशन के F-15S और F-15C शामिल हैं। इसके अलावा जर्मनी से मिले यूरोफाइटर टाइफून और पनाविया टॉरनेडो जेट भी हैं। सऊदी अरब के पास अमेरिका निर्मित THAAD और पैट्रियट जैसी मिसाइल रक्षा प्रणालियां भी मौजूद हैं। सऊदी अरब की मिसाइल क्षमता के बारे में विस्तृत जानकारी अभी भी साफ नहीं है, लेकिन उसके पास चीन से खरीदी गई दो मध्य दूरी की मिसाइलें हैं- DF-3 और DF-21। दोनों ही पारंपरिक मिसाइलें हैं, जिन्हें परमाणु हथियार दागने के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि ज़रूरत पड़ने पर सऊदी अरब को पाकिस्तान से हथियार के अलावा परमाणु क्षमता वाली मिसाइलों की भी ज़रूरत होगी।

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सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।