( जेमी लिंगवुड- लिवरपूल होप यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान विभाग में वरिष्ठ प्राध्यापक, एम्मा वार्डी- नॉटिंघम ट्रेंट यूनिवर्सिटी के विकासात्मक मनोविज्ञान प्रभाग में वरिष्ठ प्राध्यापक )
लंदन, 12 जनवरी (द कन्वरसेशन) ब्रिटेन में बच्चों और युवाओं के बीच किताबें पढ़ने की रुचि लगातार घट रही है। एक सर्वेक्षण में यह सामने आया है कि आनंद के लिए किताबें पढ़ने वाले बच्चों का अनुपात पिछले दो दशकों में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। इस स्थिति को देखते हुए ब्रिटेन सरकार, नेशनल लिटरेसी ट्रस्ट और अन्य संगठनों ने वर्ष 2026 को ‘राष्ट्रीय पठन वर्ष’ घोषित किया है, ताकि लोगों को पढ़ने के लिए फिर से प्रेरित किया जा सके।
अभियान का उद्देश्य बच्चों और परिवारों को उनकी मौजूदा रुचियों के अनुरूप पढ़ने से जोड़ना है। विशेषज्ञों के अनुसार, माता-पिता और अभिभावकों के लिए बच्चों में पढ़ने का शौक विकसित करने का सबसे प्रभावी तरीका उनके साथ मिलकर पढ़ना है, चाहे बच्चा पढ़ने में रुचि रखता हो या नहीं।
अध्ययनों से पता चलता है कि बचपन से बच्चों के साथ पढ़ने से सामाजिक और आर्थिक असमानताओं के प्रभाव को कम किया जा सकता है। छोटे बच्चों को पढ़कर सुनाने से उनके शुरुआती विकासात्मक लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलती है और वे आगे चलकर स्कूल में बेहतर प्रदर्शन करते हैं। कम उम्र से पढ़ने वाले बच्चों में भाषा सीखने की क्षमता तेज होती है और उनकी शब्दावली भी अधिक समृद्ध होती है, जिससे वे अच्छे पाठक बनते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि साझा पठन-पाठन के लाभ केवल शैक्षणिक नहीं हैं। बच्चों के साथ समय बिताकर पढ़ने से माता-पिता और बच्चों के बीच भावनात्मक संबंध मजबूत होता है, जो बच्चों और बड़ों—दोनों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। बच्चों की अध्ययन संस्था ‘बुकट्रस्ट’ की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि किताबें साझा करने से बच्चे और अभिभावक के बीच शुरुआती लगाव विकसित होता है। यही लगाव बच्चों के स्वस्थ और संतुलित विकास की आधारशिला बनता है।
जब कोई बच्चा माता-पिता या अभिभावक के साथ किताब साझा करता है, तो इससे आपसी ध्यान और संवाद बढ़ता है। पढ़ने के दौरान भावनात्मक निकटता बनती है, जिसमें वयस्क बच्चे की रुचियों और भावनाओं को समझते हैं और स्नेहपूर्ण प्रतिक्रिया देते हैं। इससे बच्चे में यह विश्वास पैदा होता है कि उसकी बातों को महत्व दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों ने माता-पिता को सलाह दी है कि पढ़ने के समय शांत और आरामदायक माहौल बनाएं, डिजिटल उपकरणों को दूर रखें और बच्चों को किताब या सामग्री चुनने की स्वतंत्रता दें। उन्होंने कहा कि पढ़ना केवल किताबों तक सीमित नहीं होना चाहिए। कॉमिक्स, पत्रिकाएं, अखबार या बच्चों की पसंद की कोई भी सामग्री साझा पठन-पाठन का माध्यम बन सकती है। जरूरत पड़े तो माता-पिता और बच्चे मिलकर अपनी खुद की कहानी या किताब भी बना सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, साझा पठन-पाठन केवल सोने से पहले ही नहीं, बल्कि दिन के किसी भी समय किया जा सकता है। यह माता-पिता, बच्चों और समुदायों के लिए किताबों के जरिए जुड़ाव, आनंद और आपसी समझ को दोबारा खोजने का एक सशक्त माध्यम है।
( द कन्वरसेशन ) मनीषा वैभव
वैभव