(फाकिर हसन)
जोहानिसबर्ग, पांच जनवरी (भाषा) दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग स्थित बीएपीएस मंदिर परिसर में 18वीं शताब्दी के योगी एवं आध्यात्मिक गुरु नीलकंठ वर्णी की 42 फुट ऊंची कांस्य प्रतिमा स्थापित की गई है।
जोहानिसबर्ग के बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) मंदिर में रविवार को स्थापित की गई यह प्रतिमा दक्षिण अफ्रीका की सबसे ऊंची कांस्य प्रतिमा है।
यह नाइजीरिया के इले-इफे में स्थित ‘‘मोरेमी स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी’’ के साथ अफ्रीकी महाद्वीप की संयुक्त रूप से चौथी सबसे ऊंची प्रतिमा का दर्जा भी रखती है।
बीएपीएस ने एक बयान में कहा कि वृक्षासन नामक योग मुद्रा के एक रूप में विराजमान यह प्रतिमा विशाल परिसर के प्रवेश द्वार पर स्थापित है और अनुशासन, युवा आदर्शवाद और आंतरिक संतुलन के एक प्रमुख सार्वजनिक प्रतीक के रूप में कार्य करती है।
बीएपीएस के मीडिया प्रवक्ता हेमांग देसाई ने कहा, ‘‘नीलकंठ वर्णी की प्रतिमा महज एक धार्मिक स्थल से कहीं बढ़कर आत्म-अनुशासन, दृढ़ता, उद्देश्य की स्पष्टता और समाज सेवा के मूल्यों का प्रतिनिधित्व करती है।’’
प्रमुख रूप से तांबे और पीतल से बनी तथा लगभग 20 टन वजनी यह प्रतिमा एक ही पैर पर टिकी हुई है, जिसे स्थानीय विशेषज्ञों द्वारा इंजीनियरिंग का एक असाधारण कारनामा बताया गया है।
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