संयुक्त राष्ट्र, तीन मार्च (भाषा) अल-कायदा की उपस्थिति और इस्लामिक स्टेट-खोरासान (आईएसआईएल-के) में भर्ती हो रहे लड़ाकों की संख्या में वृद्धि पर गंभीर चिंता जताते हुए भारत ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादियों और संगठनों को अफगानिस्तान की धरती या उसके आसपास के क्षेत्रों (परोक्ष रूप से पाकिस्तान) से किसी भी प्रकार की सहायता न मिले, इसके लिए उठाये गए कदमों का मजबूती से पालन करना सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
अफगानिस्तान पर सुरक्षा परिषद की एक बैठक में, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टी एस तिरुमूर्ति ने बुधवार को कहा कि सुरक्षा परिषद के निगरानी दल की रिपोर्ट में अफगानिस्तान से आतंकवाद को शह मिलने के प्रति गंभीर चिंता व्यक्त की गई है।
तिरुमूर्ति ने कहा, “अफगानिस्तान और आसपास के क्षेत्रों के लिए आतंकवाद एक गंभीर खतरा है। अल-कायदा की उपस्थिति और आईएसआईएल-के में भर्ती में वृद्धि गंभीर चिंता का विषय है।”
उन्होंने परोक्ष रूप से पाकिस्तान की तरफ इशारा करते हुए कहा, “सुरक्षा परिषद ने तालिबान की उस प्रतिबद्धता का संज्ञान लिया है जिसमें कहा गया था कि प्रस्ताव 1267 के तहत घोषित आतंकवादियों और आतंकी संगठनों के लिए अफगानिस्तान की भूमि का प्रयोग नहीं करने दिया जाएगा।”
तिरुमूर्ति ने कहा, “हमें यह देखना जरूरी है कि ऐसे प्रतिबंधित आतंकवादियों या संगठनों को अफगान धरती या उस क्षेत्र में स्थित आतंकवादियों की पनागाह से किसी भी तरह की सहायता नहीं मिले।”
भाषा यश माधव
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