यरूशलम, 21 जनवरी (एपी) गाजा के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शांति योजना में परिकल्पित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लेकर बुधवार को मतभेद देखने को मिले। इसमें कुछ पश्चिमी यूरोपीय देशों ने शामिल होने से इनकार कर दिया, जबकि अन्य ने कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई।
इस घटनाक्रम ने विवादास्पद और महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर यूरोपीय देशों की चिंताओं को रेखांकित किया है। इस बारे में कुछ लोगों का कहना है कि यह वैश्विक संघर्षों में मध्यस्थ के रूप में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को प्रतिस्थापित करने का प्रयास है।
ट्रंप विश्व आर्थिक मंच की बैठक में शामिल होने के लिए स्विट्जरलैंड के दावोस पहुंचे हैं, जहां उनसे बोर्ड के लिए अपने दृष्टिकोण के बारे में अधिक विवरण प्रदान करने की उम्मीद की जा रही है।
व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि बोर्ड में करीब 30 देशों के शामिल होने की उम्मीद है, लेकिन उन्होंने इस बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी।
अधिकारी ने आंतरिक योजनाओं का विवरण देते हुए कहा कि लगभग 50 देशों को संगठन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है।
नॉर्वे और स्वीडन ने बुधवार को कहा कि वे आमंत्रण स्वीकार नहीं करेंगे। इससे पहले, फ्रांस ने भी मना करते हुए इस बात पर जोर दिया था कि हालांकि वह गाजा शांति योजना का समर्थन करता है, लेकिन उसे चिंता है कि बोर्ड संघर्षों के समाधान के मुख्य मंच के रूप में संयुक्त राष्ट्र की जगह लेने का प्रयास कर सकता है।
ट्रंप की अध्यक्षता वाले इस बोर्ड की मूल रूप से परिकल्पना विश्व के नेताओं के एक छोटे समूह के रूप में की गई थी, जो गाजा युद्धविराम योजना की देखरेख करेगा। लेकिन तब से ट्रंप प्रशासन की महत्वाकांक्षाएं एक अधिक व्यापक अवधारणा में तब्दील हो गई हैं, जिसमें ट्रंप ने दर्जनों देशों को आमंत्रित किया है और संघर्ष के मध्यस्थ के रूप में बोर्ड की भूमिका का संकेत दिया है।
इस बीच, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि वह बोर्ड में शामिल होने के लिए सहमत हो गए हैं जो उनके पहले के रुख में बदलाव है, जब उनके कार्यालय ने गाजा की निगरानी के लिए गठित बोर्ड की समिति की संरचना की आलोचना की थी।
युद्धविराम के कई महीने बीत जाने के बावजूद, गाजा में 20 लाख से अधिक फलस्तीनी दो साल से चल रहे युद्ध के कारण उत्पन्न मानवीय संकट से जूझ रहे हैं। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि बुधवार को इजराइली गोलाबारी में पांच फलस्तीनी मारे गए।
नॉर्वे के विदेश मंत्री क्रिस्टोफर थोनर ने कहा कि नॉर्वे इस बोर्ड में शामिल नहीं होगा क्योंकि इसे लेकर ‘‘कई ऐसे सवाल उठते हैं जिन पर अमेरिका के साथ और बातचीत की आवश्यकता है।’’ उन्होंने यह भी कहा कि नॉर्वे दावोस में हस्ताक्षर कार्यक्रम में शामिल नहीं होगा।
स्वीडिश समाचार एजेंसी टीटी की खबर के अनुसार, स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने दावोस सम्मेलन के दौरान कहा कि उनका देश मौजूदा स्वरूप में बोर्ड के लिए हस्ताक्षर नहीं करेगा, हालांकि स्वीडन ने अभी तक औपचारिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने मंगलवार को कहा था कि फ्रांस, ‘‘अमेरिका के राष्ट्रपति की शांति योजना को लागू करने के लिए ‘हां’ कहता है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र की जगह लेने वाले एक संगठन के प्रस्तावित गठन को ‘ना’ कहता है…।’’
ब्रिटेन, यूरोपीय संघ की कार्यकारी इकाई, कनाडा, रूस, यूक्रेन और चीन ने भी अभी तक ट्रंप के आमंत्रण पर अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी है।
ट्रंप के आमंत्रण को स्वीकार करने वाले देशों में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), आर्मेनिया, मोरक्को, वियतनाम, बेलारूस, हंगरी, कजाकिस्तान और अर्जेंटीना शामिल हैं।
एपी सुभाष नरेश
नरेश