Vidhansabha Chunav 2023 : डर या मास्टर प्लान..! BJP ने MP और राजस्थान में क्यों उतारे 7-7 सांसद? वजह जानकर आप भी हो जाएंगे हैरान
MP Assembly Elections 2023| MP BJP Released the Fourth List| Rajasthan BJP Released the First List| राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023
Rajasthan-MP Assembly Elections 2023
Rajasthan-MP Assembly Elections 2023 : भोपाल। आज मध्य प्रदेश सहित 5 राज्यों के तारीखों का ऐलान हो गया है। ऐसे में बीजेपी ने एमपी में अपनी चौथी लिस्ट जारी कर दी है। जिसे मिलाकर कुल 136 पर उम्मीदवार मैदान में उतार दिए है। इतना ही नहीं मप्र के साथ बीजेपी ने छग और राजस्थान में भी सूची जारी की है। राजस्थान में एमपी की तरह पहली ही सूची में 7 सांसदों को टिकट दिया गया है। यानि कुल मिलाकर राजस्थान में पहली सूची में बीजेपी ने 41 उम्मीदवारों को मैदान में उतार दिया है।
Rajasthan-MP Assembly Elections 2023 : मध्यप्रदेश की दूसरी सूची में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला था। बीजेपी ने मध्यप्रदेश के दिग्गज नेता और 3 केंद्रीय मंत्री समेत 7 सांसदों को टिकट दिया है। तो वहीं आज राजस्थान में भी 41 उम्मीदवारों में से 7 सांसद है। बीजेपी की ये रणनीति छग, मध्यप्रदेश और राजस्थान में ही काम कर रही है। राजनीतिक गलियारों में ऐसी चर्चा हो रही है कि बीजेपी इस चुनाव में काफी डरी हुई है इसलिए मप्र और राजस्थान में ऐसा खेल खेला जा रहा है। इतना ही नहीं बीजेपी ने छत्तीसगढ़ से भी रमन सिंह, अरुण साव समेत तीन सांसदों को मौका मिला है।
राजस्थान में इस सांसदों को दिया टिकट
भाजपा ने सांसद राज्यवर्धन राठौड़ को झोटवारा से प्रत्याशी बनाया है। वहीं, मांडवा से सांसद नरेंद्र कुमार को चुनाव में प्रत्याशी बनाया गया है। इसके अलावा विद्याधरनगर से दीया कुमारी, सवाई माधोपुर से किरोड़ी लाल मीणा, तिजारा से बाबा बालकनाथ, किशनगढ़ से भागीरथ चौधरी और सांचोर से देवजी पटेल को टिकट दिया गया है।
आखिर विधानसभा का टिकट सांसदों को क्यों?
अब सवाल यह है कि भाजपा आखिर सांसदों और मंत्रियों तक को मैदान में क्यों उतार रही है। पार्टी के सूत्र और भाजपा की रणनीति को समझने वाले जानकार कहते हैं कि भाजपा इसमें कई फायदे देख रही है। इनमें से तीन की चर्चा सबसे ज्यादा है। पहला यह कि भाजपा सांसदों को उतारकर उस सीट पर जीत तय करना चाहती है, जहां से वे लड़ेंगे। इसके अलावा आसपास की सीटों पर भी असर होने की उम्मीद कर रही है। इसकी वजह यह है कि सांसद का अपने संसदीय क्षेत्र की सीटों पर असर रहता ही है। एक संसदीय क्षेत्र में अमूमन 5 से 7 सीटें आती हैं। ऐसे में भाजपा को लग रहा है कि यदि सांसद मजबूती से विधायकी लड़ेंगे तो आसपास की सीटों को भी जीतने में मदद मिलेगी।

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