मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने परीक्षाओं में नकल के मुद्दे पर किया सपा पर तंज

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मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने परीक्षाओं में नकल के मुद्दे पर किया सपा पर तंज

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  • Publish Date - July 8, 2026 / 02:12 PM IST,
    Updated On - July 8, 2026 / 02:12 PM IST

वाराणसी (उप्र), आठ जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बोर्ड परीक्षाओं में नकल के मुद्दे पर मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) पर निशाना साधते हुए कहा कि नकल को ‘जन्मसिद्ध अधिकार’ बताने वाले लोगों ने प्रदेश के नौजवानों के सामने पहचान का संकट खड़ा किया।

मुख्यमंत्री ने वाराणसी में ‘मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना’ की शुरुआत करने के बाद अपने सम्बोधन में पूर्ववर्ती सपा शासनकाल में नकल माफिया की सक्रियता का जिक्र करते हुए कहा कि पूर्व में हिमाचल प्रदेश, जम्मू—कश्मीर, पंजाब और अन्य राज्यों के लोग यूपी बोर्ड की परीक्षा के लिये नामांकन कराते थे और उनका परीक्षा केंद्र वाराणसी, लखनऊ, गौतमबुद्ध नगर या गोरखपुर में नहीं बल्कि बलिया, गाजीपुर, आजमगढ़ और मऊ में पड़ता था।

उन्होंने कहा, ”हमने सोचा कि क्या बलिया, गाजीपुर, आजमगढ़ और मऊ शिक्षा के क्षेत्र में इतने आगे हो गये हैं, हमने कहा कि दाल में कुछ काला जरूर है और फिर हमने अभियान चलाया तो सारे कुकुरमुत्ते (नकल माफिया) और सारे अड्डे बंद हो गये।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच के दौरान तह में जाकर देखा गया तो मालूम हुआ कि परीक्षा के लिये फार्म भरने वाला छात्र तो नकल माफिया को ठेका देता था। उन्होंने कहा कि वह परीक्षा देने नहीं आता था और उत्तीर्ण का प्रमाण पत्र उसके घर पहुंच जाया करता था।

आदित्यनाथ ने किसी का नाम लिये बगैर कहा, ”यह बड़ी विचित्र सी स्थिति थी इसीलिए उत्तर प्रदेश के एक नेता ने कहा था कि नकल करना हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है। जब नकल करना ही जन्मसिद्ध अधिकार हो तो उसको क्या कह सकते हैं।”

‘नकल करना जन्मसिद्ध अधिकार’ वाले बयान को सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव से जोड़कर देखा जाता है जिन्होंने वर्ष 1992 में उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तत्कालीन सरकार द्वारा लाये गये ‘नकल विरोधी अध्यादेश’ का पुरजोर विरोध किया था और वर्ष 1993 में प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने पर सबसे पहले इस अध्यादेश को वापस लिया था।

आदित्यनाथ ने कहा कि यही नकल का जाल प्रदेश के नौजवानों के सामने पहचान का संकट खड़ा करता था। उन्होंने कहा, ”हम सबको याद रखना होगा, कुछ भी हो, किसी भी व्यक्ति को देश के भविष्य और अखंडता के साथ खिलवाड़ करने का कोई अधिकार नहीं है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व में कभी उत्तर प्रदेश के शिक्षक पढ़ाने के लिये दूसरे राज्यों में जाया करते थे ”मगर एक समय ऐसा भी आया, जब उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लोगों ने अपने स्वार्थ के लिए पूरी तरह बर्बाद कर दिया।”

मुख्यमंत्री ने आचार्य चाणक्य, पंडित मदन मोहन मालवीय और डॉक्टर राधा कृष्णन का नाम लेते हुए कहा कि लोगों को अपना आदर्श ढूंढने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर चाणक्य जैसा गुरु होगा तो देश कभी विपन्न नहीं हो सकता और विदेशी ताकतें आंख उठा कर देख भी नहीं सकती हैं और इस प्रकार के माहौल को बनाने के लिए पिछले नौ वर्षों के दौरान शिक्षकों ने मेहनत और प्रयास किये हैं।

उन्होंने कार्यक्रम में शुरू की गयी सुविधाओं का जिक्र करते हुए कहा कि कैशलेस इलाज की सुविधा से प्रदेश के 12 लाख शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी लाभान्वित होंगे।

मुख्यमंत्री ने बताया कि देश में अपनी तरह की इस पहली योजना में 10 हजार रुपये से अधिक वेतन पाने वाले अस्थायी शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को 10 लाख रुपये का ग्रुप टर्म इंश्योरेंस कवर, एक करोड़ रुपये का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा, एक करोड़ रुपये का स्थायी दिव्यांगता कवर और किसी अनहोनी की दशा में शिक्षक या कार्मिक के बच्चों की शिक्षा और पुत्री के विवाह के लिए भी ऐड ऑन कवर दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि साथ ही 10 हजार रुपये अधिक वेतन पाने वाले संविदाकर्मियों के लिये भी 80 लाख रुपये तक के बीमा की सुविधा दी गयी है।

भाषा सलीम मनीषा रंजन

रंजन